अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में बाल श्रमिक विद्या योजना लागू होगी। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि आर्थिक मजबूरी के कारण कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इस मामले में सरकार युवाओं और श्रमिकों को बेहतर अवसर देने के लिए कौशल विकास, रोजगार मेले, सेवामित्र व्यवस्था और श्रमिक सुविधा केंद्रों को मजबूत कर पर जोर दे रही है।
बताते चलें कि वर्तमान में योजना 20 जनपदों में संचालित है। मुख्यमंत्री ने इसे नए प्रावधानों के साथ प्रदेश के सभी 75 जनपदों में लागू करने के निर्देश दिए। आज एवं सेवायोजन विभाग की विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों और प्रस्तावित योजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी बच्चा आर्थिक मजबूरी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री ने श्रमिक कल्याण, कौशल विकास और रोजगार सृजन को और व्यापक तथा परिणाममुखी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। साथ ही उन्होंने प्रदेश के सभी 75 जनपदों में बाल श्रमिक विद्या योजना को विस्तारित करने, के अलावा सेवामित्र व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा निर्माण श्रमिकों के लिए बड़े शहरों में आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र विकसित करने तथा रोजगार मिशन को वैश्विक अवसरों से जोड़ने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री का कहना था कि बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को विद्यालयों से जोड़ा जाए और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए। बैठक में यह भी कहा गया कि वर्ष 2020 में प्रारंभ की गई इस योजना के तहत 8 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि यह लोग केवल उत्पादन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और प्रगति की सबसे बड़ी शक्ति हैं। इसके लिए उन्होंने श्रमिकों सहित युवाओं और कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित कार्य वातावरण और बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जाने की भी बात की।
आगे उन्होंने यह भी कहा कि निजी क्षेत्र के सहयोग से इन बच्चों के कौशल विकास की कार्ययोजना भी तैयार की जाए। हालाँकि वर्तमान में पोर्टल पर 1097 सेवा प्रदाता, 5049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं।