शंकराचार्य स्वरूपानंद ने वासुदेवानंद के शंकराचार्य होने पर उठाए सवाल

अयोध्या में राममंदिर ट्रस्ट के गठन के बाद अब धीमे धीमे उसका विरोध तेज होने लगा है। अयोध्या के साधु संतों के साथ –साथ अब शंकराचार्य भी अब इसके विरोध में आगे आ गए है। राममंदिर के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ने वाले शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने राममंदिर ट्रस्ट का विरोध करते हुए इसके खिलाफ कोर्ट जाने की बात कही है। शंकराचार्य ने कहा कि जब पहले से ही राममंदिर के लिए रामालय ट्रस्ट था तो फिर नया ट्रस्ट क्यों बनाया गया है।

इसके साथ ही शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने ट्रस्ट में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती को शामिल करने पर भी सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्तर पर न्यायपलिका ने अपने निर्णय में वासुदेवानंद सरस्वती को शंकराचार्य को दूर संन्यासी भी नहीं माना है तो फिर उनको ट्रस्ट में कैसे शामिल किया गया है। शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती को ट्रस्ट में शामिल किए जाने को उन्होंने कोर्ट के निर्णयों की अवेहलना बताया है।

 

इसके साथ ही शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि उन्होंने अपने निर्णय से शंकराचार्य पद की गरिमा कम की है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर बतौर शंकराचार्य किसी को ट्रस्ट में रखा जा रहा था तो उसे ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए न कि सदस्य। उन्होंने केंद्र सरकार पर मान्य शंकारचार्यों से अपराधी जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया है।

शंकचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने राममंदिर निर्माण के लिए नए ट्रस्ट के गठन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पहले से ही मंदिर निर्माण के लिए रामालय ट्रस्ट बना हुआ था तो नए ट्रस्ट को बनाने के जरुरत किया है। इसके साथ ही ट्रस्ट में बतौर दलित सदस्य आरएसएस से जुड़े व्यक्ति को शामिल करने पर भी उन्होंने मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।

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