भारत में आईटी क्षेत्र को बढ़ावा देने वाले एस एम कृष्णा नहीं रहे

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और विदेश मंत्री रहे सोमनहल्ली मल्लैया कृष्णा का आज सुबह 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। अपने कार्यकाल में उन्होंने आईटी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई महायुपूर्ण कदम उठाए गए थे। उनके प्रयास के नतीजे में बंगलूरू को भारत की ‘सिलिकॉन वैली’ का खिताब मिला।

भारत में आईटी क्षेत्र को बढ़ावा देने वाले एस एम कृष्णा नहीं रहेएस एम कृष्णा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख व्यक्त करते हुए ट्वीट में लिखा- ‘एसएम कृष्णा एक असाधारण नेता थे, सभी क्षेत्रों के लोग उनकी प्रशंसा करते थे। उन्होंने हमेशा दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अथक कोशिश की। उन्हें कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के लिए याद किया जाता है, खासकर बुनियादी ढांचे के विकास पर उनके फोकस के लिए। एसएम कृष्णा एक बहुत पढ़ने वाले और विचारक भी थे।’

92 वर्षीय एस एम कृष्णा नेअपने पांच दशक के राजनीतिक करियर में केंद्र और राज्य सरकार में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने विधान परिषद्, विधानसभा सदस्य, अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय विदेश मंत्री और राज्यपाल के रूप में कार्य किया। उन्होंने सात जनवरी, 2023 को राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की।

गौरतलब है कि विदेश मंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रह चुके कृष्णा को बंगलूरू को वैश्विक नक्शे में स्थापित करने और आईटी हब के रूप में विकसित करने का श्रेय जाता है। पिछले वर्ष जनवरी में उन्होंने अपनी अधिक उम्र के कारण सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की थी।

पहली मई 1932 को कर्नाटक के मांड्या जिले के जन्मे सोमनहल्ली कृष्णा ने अमरीका में डलास, टेक्सास में दक्षिणी मेथोडिस्ट विश्वविद्यालय और वाशिंगटन डीसी में जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से लॉ स्कूल से स्नातक की पढ़ाई की थी। यहां वे फुलब्राइट स्कॉलर थे।

दिसंबर 1989 से जनवरी 1993 तक उन्होंने कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी संभाली। साल1971 से 2014 के मध्य वह कई बार लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य बने। साल 1999 के विधानसभा चुनावों से पूर्व कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। पार्टी की जीत के बाद वह मुख्यमंत्री नियुक्त हुए।

एस एम कृष्णा ने 1962 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के केवी शंकर गौड़ा के विरुद्ध मद्दुर सीट से एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल कर के अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की। बाद में वह प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े और फिर कांग्रेस ज्वाइन की। एसएम कृष्णा कांग्रेस में शामिल होने से पहले प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य थे। कांग्रेस के साथ आधी शताब्दी तक जुड़े रहे कृष्णा मार्च 2017 में भाजपा में शामिल हो गए।

उन्होंने दिसंबर 2004 से मार्च 2008 तक महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्य किया और मई 2009 से अक्टूबर 2012 तक मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। 

कानून में विशेषज्ञ कृष्णा 1989 में कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष बने और 1992 में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री बने। 1996 में वह राज्यसभा के लिए चुने गए और अक्टूबर 1999 तक इसके सदस्य रहे। 1999 के विधानसभा चुनाव से पहले वह कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष थे, जिसमें पार्टी ने जीत हासिल की। वह अक्तूबर 1999 से मई 2004 तक मुख्यमंत्री रहे। 

एस एम कृष्णा ने बंगलूरू में अपने घर पर अंतिम सांसें लीं। कृष्णा के परिवार में उनकी पत्नी प्रेमा कृष्णा और दो बेटियां मालविका कृष्णा और शांभवी कृष्णा हैं।

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