फिल्म रिव्यु : ‘रॉक ऑन 2’

मुंबई।  साल 2008 में आई फरहान अख्तर के बैनर की म्यूजिकल फिल्म ‘रॉक आन’ का अब आठ साल बाद सीक्वल ‘रॉक ऑन 2’ आया है। बैंड ग्रुप पर बनी इस म्यूजिकल फिल्म में कितना दम है  इसके लिए आइए फिल्म का रिव्यु पड़ते हैं। ये कहानी लगभग वहीं से शुरू होती हैं, जहां ‘रॉक ऑन’ के निर्देशक अभिषेक कपूर ने इसे छोड़ा था। चार दोस्तों के बैंड मैजिक के कीड बोर्ड प्लेयर रॉब (ल्यूक केनी) की मौत के बाद बैंड एक बार फिर से बिखर गया है। बैंड का लीड सिंगर आदित्य उर्फ आदि (फरहान अख्तर) अब मेघालय में रहता है और वहां के किसानों की मदद करता है। वह उनके उत्थान के लिए कई तरह के कार्य करने में लगा है। अब यह सब उसकी जिंदगी का मकसद है। rock on 2

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उधर, मुंबई में जोसेफ उर्फ जो (अर्जुन रामपाल) अब एक नामी पब का मालिक बन चुका है और संगीत के एक रियेलिटी शो का जज भी। उसने बहुत पैसा कमा लिया है, लेकिन संगीत से वह भी दूर जा चुका है। मैजिक के सपनों की थोड़ी बहुत बची हुई डोर अब केवल केडी (पूरब कोहली) के हाथों में है, जो संगीत की समझ न रखने वालों के लिए संगीत बना रहा है।

इस बार सब एक दूजे से दूर जरूर हैं, लेकिन बिना किसी मन मुटाव के। इनके बीच दोस्ती अब भी कायम है। किन्हीं कारणों से आदि को मेघालय छोड़ कर वापस मुंबई आना पड़ता है, ये तीनों दोस्त एक दिन फिर से संगीत के जरिए एकजुट होने की सोचते हैं और इनकी सोच को बल मिलता है जिया (श्रद्धा कपूर) और उदय (शशांक अरोड़ा) जैसे नई पीढ़ी के लोगों से, जो संगीत की दुनिया में अपना कुछ करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जिया के पिता पंडित विभूति (कुमुद मिश्रा) शास्त्रीय संगीत की दुनिया में एक जाना पहचाना नाम हैं, लेकिन उन्हें आजकल के फ्यूजन संगीत से चिढ़ है और उदय लखनऊ से आया एक सरोद वादक है, जो राग खमाज को वेस्र्टन फ्यूजन के साथ पेश कर अपना संगीत बनाना चाहता है।

जिया अपने पिता से चोरी छिपे रॉक फ्यूजन पर काम करती है। मैजिक बैंड से जुड़ने के बाद जिया और उदय को लाइव परफारमेंस का एक मौका मिलता है, जहां जिया अपना आत्मविश्वास खो देती है। उधर, आदि को एक बार फिर मेघालय में किसानों की मदद के लिए वापस जाना पड़ता है, जिससे उसकी पत्नी साक्षी (प्राची देसाई) और उसके बीच मतभेद हो जाते हैं। जिया को परफारमेंस का मौका देने की वजह से आदि, जो और केडी के बीच भी दूरियां बढ़ जाती हैं और सब कुछ एक बार फिर से बिखर जाता है। लेकिन मेघालय में होने वाला एक रॉक कॉन्सर्ट इन सबको एक बार फिर मिला देता है। rock on 2

अपने पहले पार्ट के मुकाबले ये दूसरा पार्ट कहानी के मामले में थोड़ा कमजोर लगता है। ऊपर से इस बार फिल्म का संगीत भी औसत है। इसके गीत बस फिल्म देखते समय कुछ देर के लिए ही अच्छे लगते हैं। मुश्किल है कि आप थियेटर से बाहर आते समय इसका कोई गीत गुनगुनाते निकलें। बात केवल रॉक आधारित गीतों की ही नहीं है। ‘रॉक ऑन’ का एक गीत ये तुम्हारी मेरी बातें… सरीखा मध्यम धुन सरीखे वाले गीत इसमें भी हैं, लेकिन वह कम असर जगाते हैं।

फिल्म की सबसे बड़ी दिक्कत है इसके किरदारों के आपसी झंझावात, जबकि यही झंझावात पिछली फिल्म की ताकत थी। शायद ये दोहराव ही इस कहानी में पहले जैसा असर नहीं जगा पाता। rock on 2

केडी के किरदार में भी कोई बदलाव नहीं है। वह पहले जैसा ही पीड़ित दिखता है, जो आदि एवं जोसेफ की वजह से बार बार अपने संगीत से दूर हो जाता है। यहां केवल जोसेफ का किरदार है, जिसमें कुछ नया लगा है। उसके पास पैसा आ गया है और साथ में घमंड भी। आदि, साक्षी से पहले भी दूर था और अब भी। इस भाग में आए दो नए किरदार जिया और उदय इन सबके बीच दब गए हैं। उदय तो बिलकुल ही दब गया है। हालांकि उसके सरोद से निकली धुनें कुछ संभावनाएं जरूर जगाती हैं, लेकिन जिया की मुश्किलों भरी जिंदगी यहां भारी पड़ने लगती है। इस कहानी में संगीत की बात कम रिश्तों की बात ज्यादा दिखाई पड़ती है। rock on 2

इंटरवल से पहले की फिल्म में फिर भी तेजी है। इसकी वजह है इन तीनों बंदों की दोस्ती, फिर से मिलना जुलना, जिया और उदय के किरदारों का आस्तित्व में आना वगैराह, फिल्म में बांधे रखता है। इस कहानी में रियेलिटी शोज और संघर्ष कलाकारों तथा स्थापित संगीतकारों की बेबसी को भी दर्शाया गया है। ये सब थोड़े थोड़े समय के लिए अच्छा लगता है। फिल्म का माहौल वगैराह भी अच्छा है। वाजूद इसके इसमें वो स्पार्क नहीं है, वो चोट नहीं है जो ‘रॉक ऑन’ में थी।

सितारे: फरहान अख्तर, अर्जुन रामपाल, पूरब कोहली, श्रद्धा कपूर, शशांक अरोड़ा, कुमुद मिश्रा, प्राची देसाई, शहाना गोस्वामी
निर्देशक: शुजात सौदागर
निर्माता: फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी, सुनील ए. लुल्ला
कहानी: अभिषेक कपूर, पुबाली चौधरी
संगीत: शंकर एहसान लॉय
गीत: जावेद अख्तर
संवाद: फरहान अख्तर

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