जनगणना-2027 की तैयारी के दौरान चूक से बचने और बेहतर परिणामों के लिए खास ध्यान रखा जा रहा है। ऐसे में भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त ने सभी प्राकृतिक और प्रशासनिक सीमाओं को मानचित्रों में अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि इस बार की जनगणना 16 वर्षों बाद दो चरणों में होगी, जिसमें जातिगत गणना भी शामिल रहेगी। आरजीआई यानी भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त ने सभी निदेशालयों को निर्देश जारी किए हैं कि देश में जनगणना के दौरान भौगौलिक क्षेत्र की पूरी कवरेज सुनिश्चित की जाए। उन्होंने प्रशासनिक सीमाओं से जुड़े मौजूदा भू-स्थानिक डाटा को भी अपडेट किये जाने की बात कही है ताकि जनगणना के दौरान कोई भी क्षेत्र न छूटे या दोहराव न हो।
इस कवरेज के लिए नदी, वन जैसी सभी प्राकृतिक विशेषताओं, परिवहन मार्गों (राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग एवं रेल पटरियां) को मानचित्र विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए भू-स्थानिक डाटा में अपडेट करना अनिवार्य है।
आगे उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के साथ-साथ रेल लाइनों (ब्रॉड गेज और मीटर गेज) जैसी परिवहन सुविधाओं को भी नवीनतम जानकारी के आधार पर सावधानीपूर्वक अपडेट किया जाना जाए।
आदेश के अनुसार ये अपडेट किया हुआ डाटा डिजिटल फ्रेमवर्क के रूप में प्रयोग होगा, जिससे घरों की सूची के खंड बनाए जाएंगे। अपडेट की गई प्रशासनिक सीमाएं इसलिए बेहद जरूरी हैं, जिससे क्षेत्रीय कार्यों और जनगणना कवरेज की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके।
आरजीआई ने बताया कि इन मानचित्रों का उपयोग हर गांव और शहर (वार्ड सहित) की पुष्टि के लिए किया जाएगा कि वे किस उप-जिला या शहरी निकाय में आते हैं। गौरतलब कि ये सभी अपडेट एक जनवरी 2010 के बाद हुए प्रशासनिक बदलावों को कवर करेंगे, जिनकी अधिसूचना संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों ने जारी की है।
आरजीआई ने कहा, यह जनगणना की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है और राज्यों, जिलों, उप-जिलों, शहरों, वार्डों और गांवों की मौजूदा सीमाओं के अनुसार प्रशासनिक सीमाओं को अपडेट करना जरूरी है। इसका मकसद जनगणना के दौरान देश के हर कोने को कवर करना है।
इसमें यह भी कहा गया है कि रेल स्टेशनों की सही लोकेशन, साथ ही राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के नाम व नंबर सही तरीके से दर्शाए जाने चाहिए। इस अपडेट का काम पूरा होने के बाद उप-जिलों और शहरी स्थानीय निकायों के कार्य मानचित्र (वर्किंग मैप) तैयार किए जाएंगे और उन्हें गांवों व शहरों की सूची के साथ जिला जनगणना अधिकारी (डीसीओ) के जनगणना अनुभाग को भेजा जाएगा, जिन्हे संबंधित अधिकारी करवाएंगे।
बताते चलें कि भारत की 16वीं जनगणना साल 2027 में होगी, जिसमें जातिगत जनगणना भी शामिल है। पहली अक्तूबर 2026 से इसे लद्दाख जैसे बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जबकि पहली मार्च 2027 से देश के बाक़ी हिस्सों में कार्यान्वित किया जाएगा।
यह जनगणना दो चरणों में होगी, जिसमें जातियों की गणना भी साथ-साथ की जाएगी। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। आरजीआई नारायण ने पहले एक पत्र में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से कहा था कि नगर निगमों, राजस्व गांवों, तहसीलों, उप-विभागों या जिलों की सीमाओं में प्रस्तावित बदलाव 31 दिसंबर से पहले कर लिए जाएं।
नियम के मुताबिक, जनगणना तभी की जा सकती है, जब प्रशासनिक सीमाओं को स्थिर किए हुए कम से कम तीन महीने बीत चुके हों। इसमें जिले, उप-जिले, तहसील, तालुका और थाने शामिल होते हैं।













