एक नई साइंटिफिक स्टडी से पता चला है कि ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) से प्रभावित ऑटिस्टिक दिमाग, नॉन-ऑटिस्टिक लोगों की तुलना में गलती पहचानने पर कम रिएक्ट करते हैं, जिससे कुछ लोगों के लिए बदलते हालात के हिसाब से अपने व्यवहार को बदलना मुश्किल हो जाता है।
एक हालिया वैज्ञानिक शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि ऑटिज़्म से पीड़ित लोगों के दिमाग पर गलतियों का पता लगाने या फीडबैक का असर सामान्य लोगों की तुलना में कम होता है। अक्टूबर 2026 में सामने आई रिसर्च के अनुसार, ऑटिस्टिक और नॉन-ऑटिस्टिक लोगों का दिमाग गलतियों (Errors) और फीडबैक (Feedback) को बिल्कुल अलग तरीके से प्रोसेस करता है।
यह स्टडी की यूके नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी और जेरूसलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट्स ने की थी, जिसके नतीजे द जर्नल ऑफ़ न्यूरोसाइंस जर्नल में पब्लिश हुए थे।रिसर्चर्स ने एक्सपेरिमेंट के दौरान पार्टिसिपेंट्स के दिमाग की एक्टिविटी रिकॉर्ड की, उन्हें आवाज़ पहचानने के काम दिए और अगर उन्होंने कोई गलत जवाब दिया तो उन्हें बताया गया।
एक रिपोर्ट के मुताबिक़, नॉन-ऑटिस्टिक लोग अपने पिछले सफल अनुभवों के आधार पर अगले फैसले लेते हैं, जबकि ऑटिज़्म से पीड़ित व्यक्ति पुरानी सफलताओं या गलतियों से अपनी अगली पसंद को प्रभावित नहीं होने देते।
नतीजों के मुताबिक, ऑटिस्टिक लोगों के दिमाग ने नेगेटिव फीडबैक के जवाब में तुलनात्मक रूप से कम एक्टिविटी दिखाई, वे अपने फैसलों और पिछली सफलताओं पर अपने कॉन्फिडेंस से भी कम प्रभावित हुए, जबकि नॉन-ऑटिस्टिक लोगों के फैसलों पर इन फैक्टर्स का ज़्यादा असर पड़ा।