पाकिस्तान में राजनाथ सिंह को मिलेगी राष्ट्रपति स्तर की सुरक्षा

इस्लामाबाद। जमात-उद-दावा चीफ हाफिज सईद की चेतावनी के बाद पाकिस्तान सरकार ने फैसला किया कि भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह को ‘राष्ट्रपति स्तर की’ सुरक्षा दी जाएगी। राजनाथ सिंह 3-4 अगस्त को सार्क देशों के गृह मंत्रियों की बैठक के लिए इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं।

rajnath singh

राजनाथ को अगर राष्ट्रपति के स्तर की सुरक्षा दी जाती है तो इसका मतलब है कि उनके साथ 200 सुरक्षाकर्मियों का दस्ता रहेगा जिसमें पाकिस्तान की स्पेशल फोर्स के कमांडो भी शामिल रहेंगे। एक अंग्रेजी अखबार के हवाले से खबर है कि राजनाथ की सुरक्षा का फैसला पीएम नवाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई एक हाई लेवल मीटिंग में लिया गया।

जमात-उद-दावा चीफ हाफिज सईद की चेतावनी के बाद पाकिस्तान सरकार ने फैसला किया कि भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह को ‘राष्ट्रपति स्तर की’ सुरक्षा दी जाएगी। नवाज की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पाकिस्तान के गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नासिर खान जंजुआ, आईएसआई डीजी रिटायर्ड जनरल रिजवान अख्तर, इंटेलिजेंस ब्यूरो डीजी आफताब सुल्तान और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।आमतौर पर, किसी भी गृह मंत्री को पाक आने पर मंत्री के स्तर की सुरक्षा मुहैया कराई जाती है लेकिन भारत ने पाकिस्तान से आतंक की आहट के बाद अपने समकक्षों को सुरक्षा बढ़ाने के लिए कहा था। सूत्रों के मुताबिक, राजनाथ जिस लग्जरी होटल में ठहरेंगे वह हाई सिक्यॉरिटी जोन में है, जहां पीएम ऑफिस, फॉरेन मिनिस्ट्री, और प्लोमेटिक एंक्लेव एक किलोमीटर के रेडियस में ही स्थित हैं।

सार्क गृह मंत्रियों की बैठक भी इसी जगह होने की संभावना है। यहां उसके लिए तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सूत्र बता रहे हैं कि स्नाइपर्स और एरियल कवर की सुरक्षा देने पर भी विचार किया जा रहा है। राजनाथ की सुरक्षा को खतरे का अंदेशा हाफिज सईद की चेतावनी के बाद बढ़ गया था।

सईद ने एक बयान में कहा कि मैं पाकिस्तान सरकार से कहना चाहता हूं कि बेगुनाह कश्मीरियों की मौत के लिए जिम्मेदार राजनाथ का स्वागत करके वह कश्मीरियों के जख्मों का अपमान करेंगे। 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड ने कहा कि अगर 3 अगस्त को सिंह इस्लामाबाद आते हैं तो जेयूडी देशभर में विरोध करेगा ताकि दुनिया को यह बताया जा सके कि पाकिस्तान के हुक्मरान की कश्मीरियों के हत्यारों की अगवानी करने की कोई मजबूरी हो सकती है, लेकिन पाकिस्तान की जनता जुल्म के शिकार कश्मीरियों के साथ है।

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