प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिन यानी 11 मई 2026 को युद्ध व अस्थिरता जैसे वैश्विक संकट के दौर में देशहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नागरिकों से ऊर्जा संरक्षण, विदेशी मुद्रा बचाने, स्वदेशी अपनाने और पेट्रोल-डीजल का संयम से उपयोग करने जैसे कड़े संकल्प लेने की अपील की है।
देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और आर्थिक मजबूती बढ़ाने की मुहिम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से चार कमोडिटीज का इस्तेमाल ज्यादा समझदारी से करने की अपील की है। ये हैं- कच्चा तेल (पेट्रोल-डीजल), सोना, वनस्पति तेल और खाद। प्रधानमंत्री की ये टिप्पणियां पश्चिम एशिया संकट के बीच आई हैं।
गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 से जारी अमरीका-ईरान युद्ध ने आयात की लागत में काफी बढ़ोतरी कर दी है। मणि कंट्रोल की एक खबर के मुताबिक़, इन चारों कमोडिटीज की भारत में खपत कितनी ज्यादा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश का 240 अरब डॉलर से ज्यादा का आयात सिर्फ इन 4 कमोडिटी ग्रुप से हुआ।
एनालिसिस से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2025–26 में भारत ने 240.7 अरब डॉलर का कच्चा तेल, सोना, वनस्पति तेल और खाद विदेश से मंगाई। यह देश के कुल 775 अरब डॉलर के आयात बिल का 31.1 प्रतिशत है।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे पेट्रोलियम का रहा, जिसका आयात 134.7 अरब डॉलर का रहा। सोने का आयात बढ़कर रिकॉर्ड 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वनस्पति तेल का आयात 19.5 अरब डॉलर और खाद का आयात बढ़कर 14.5 अरब डॉलर हो गया।
मप्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि वे इलेक्ट्रिक व्हीकल का इस्तेमाल करें। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मदद लें। कार-पूलिंग करके और माल ढुलाई को रेलवे पर शिफ्ट करके पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने की अपील भी उन्होंने की है।
साथ ही प्रधानमंत्री ने नागरिकों से कहा है कि किसानों से डीजल से चलने वाले पंपों की जगह सौर ऊर्जा वाले विकल्प अपनाने और रासायनिक खाद का इस्तेमाल 50 प्रतिशत तक कम करने का आग्रह किया है।
अपनी अपील में प्रधानमंत्री ने घरों में खाने के तेल का इस्तेमाल कम करने और गैर-जरूरी सोने की खरीदारी को एक साल के लिए टालने की भी सलाह दी है।
बताते चलें कि सोने का आयात वित्त वर्ष 2025 में 58 अरब डॉलर था जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 72 अरब डॉलर हो गया। इसमें लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, उर्वरक का आयात 77 प्रतिशत बढ़कर 14.6 अरब डॉलर हो गया। कच्चे तेल का आयात वित्त वर्ष 2025 के 143.1 अरब डॉलर से कम रहा, फिर भी यह भारत के कुल आयात का 17.4 प्रतिशत है। वनस्पति तेलों का हिस्सा 2.5 प्रतिशत और उर्वरकों का 1.9 प्रतिशत रहा। गौरतलब है कि सोना और खाद इस आयात बास्केट के सबसे तेजी से बढ़ने वाले घटक हैं।