ईरानी शहर मीनाब में अमरीकी हमले में शहीद हुए स्कूली बच्चों के माता-पिता ने कैथोलिक ईसाइयों के धार्मिक नेता पोप लियो को चिट्ठी लिखकर अपनी बात कही है।
ईरान में यूएस हमले में शहीद हुए मीनाब स्कूल के बच्चों के माता-पिता ने पोप लियो को चिट्ठी लिखकर शहीद बच्चों की आवाज़ बनने के लिए उनका शुक्रिया अदा किया। साथ ही चिट्ठी में कहा गया है कि आपका ‘हथियार डाल दो’ का मैसेज ज़रूर सुना जाएगा।
पत्र में इन अभिभावकों ने अपना दर्द बयान करते हुए लिखा है, ‘हम यह पत्र आपको कांपते हाथों और दर्द से भरे दिलों के साथ लिख रहे हैं, और यह पत्र हम दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में स्थित उस स्कूल की राख और मलबे के बीच से लिख रहे हैं।’ वे आगे कहते हैं, ‘हम उन 168 बच्चों के माता-पिता हैं, जो इन दिनों अपने बच्चों के गर्म शरीर को गले लगाने के बजाय, उनके जले हुए बैग और खून से सनी कॉपियों को अपने सीने से लगाए हुए हैं; ये वे मासूम बच्चे थे जिनका एकमात्र ‘अपराध’ कक्षा में मुस्कुराना था।’
वे अपने पत्र में उस राहत का भी ज़िक्र करते हैं जो उन्हें इस कठिन दौर में मिली। वे कहते हैं, ‘जब धमाकों की भयानक आवाज़ ने दुनिया के कानों को हमारी चीखों के प्रति बहरा कर दिया था, तब आपके [पोप के] शांतिपूर्ण शब्दों की गूंज हमारे गहरे ज़ख्मों के लिए मरहम बन गई।’
याद दिला दें कि व्हाइट हाउस ने अभी तक मीनाब स्कूल हमले के लिए माफ़ी नहीं मांगी है।मीनब के एक स्कूल पर किए गए अमरीकी हमले में लड़कियों समेत 160 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी। स्कूल पर यह हमला 28 फरवरी को हुआ था।
लियो XIV की उन साहसी अपीलों की याद दिलाते हुए ये परिवार पत्र में कहते हैं कि पोप का हर शब्द बच्चों को बचाने और बढ़ती नफ़रत, हिंसा तथा मासूमों की जान जाने के प्रति दुनिया की अंतरात्मा को जगाने का एक प्रयास था। याद दिला दें कि पोप ने पहले भी विश्व शक्तियों से हिंसा और बमबारी का स्तर कम करने का आग्रह किया था।
अपने पत्र में मिनाब के शहीद छात्रों के माता-पिता यह भी कहते हैं कि वे जानते हैं कि उनके बच्चे अब कभी घर लौटकर एक बेहतर कल का निर्माण नहीं कर पाएंगे, लेकिन पोप जैसी हस्ती उन बेज़ुबान बच्चों की आवाज़ बनी रह सकती है और ऐसे सभी रास्ते खोलने के लिए काम कर सकती है, ताकि इस धरती पर किसी भी अन्य माता-पिता को ऐसी ही किसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
दूसरी ओर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेशकेशियन ने कहा कि वह नेशनल गर्ल्स डे पर अपनी ज़मीन की बेटियों को बधाई देते हैं। हम अपने प्रियजनों, खासकर मनाब स्कूल की मासूम बेटियों की शहादत से दुखी हैं।
उन्होंने कहा कि हमारी बेटियां रमज़ान में युद्ध के पहले दिन अमरीकी और ज़ायोनी दुश्मनों के हाथों शहीद हो गईं। सम्माननीय ईरानी राष्ट्र को यह जान लेना चाहिए कि हमारी शहीद बेटियों का खून कभी बेकार नहीं जाएगा।