दुनिया भर में 6 महीने से कम उम्र के केवल 48 प्रतिशत शिशुओं को ही पूरी तरह स्तनपान कराया जाता है- रिपोर्ट

अगस्त का पहला सप्ताह ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ के रूप में मनाया जाता है। इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे समाज के बेहतर भविष्य में एक निवेश बताया गया है।

दुनिया भर में 6 महीने से कम उम्र के केवल 48 प्रतिशत शिशुओं को ही पूरी तरह स्तनपान कराया जाता है- रिपोर्ट

इसका उद्देश्य हर माँ को उचित जानकारी, प्रशिक्षित सलाहकारों से मदद, और ऐसा पारिवारिक, चिकित्सीय और कार्यस्थल वातावरण सुनिश्चित करना है, जो स्तनपान को प्रोत्साहित करे और माँ को सशक्त बनाए।

यह सप्ताह इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन के ‘स्वस्थ्य शुरुआत, आशावान भविष्य’ अभियान के तहत आयोजित किया गया है। इसका मक़सद माताओं और शिशुओं को स्तनपान के पूरे सफ़र में समुचित स्वास्थ्य सेवाएँ और सहायता देने पर ज़ोर देना है।

हर व्यक्ति को यह समझना होगा कि स्तनपान केवल शिशु का पोषण नहीं, बल्कि समाज का दीर्घकालिक स्वास्थ्य निवेश है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर किये जाने वाले ख़र्च में कमी आती है और बच्चों की बौद्धिक क्षमता में सुधार होता है। इसके अलावा आर्थिक उत्पादन बढ़ने के साथ सम्पूर्ण पीढ़ियों को बेहतर शुरुआत मिलती है।

स्तनपान बच्चों को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका है। यह बच्चे को सर्वोत्तम पोषण के साथ रोगों से लड़ने की ताकत देता है, जिससे दस्त और निमोनिया जैसी बीमारियों से बचाव होता है। स्तनपान केवल बच्चे के लिए ही नहीं माताओं में स्तन कैंसर, डिम्बग्रंथि कैंसर और टाइप-2 मधुमेह के खतरे को कम करता है।

वर्तमान में इस समय दुनिया भर में 6 महीने से कम उम्र के केवल 48 प्रतिशत शिशुओं को ही पूरी तरह स्तनपान कराया जाता है। पिछले 12 सालों में यह आंकड़ा 10 प्रतिशत बढ़ा है, जिससे लाखों बच्चों की जान बची है।

वर्तमान अनुमानों के अनुसार, हर साल क़रीब 2 लाख 60 हज़ार महिलाओं की गर्भावस्था या प्रसव के दौरान मृत्यु हो जाती है, जबकि 20 लाख शिशु अपने जन्म के पहले महीने में दम तोड़ देते हैं। साथ ही, लगभग 20 लाख शिशु मृत पैदा होते हैं, यानि हर 7 सेकंड में एक मौत, जिसे टाला जा सकता था। यह स्थिति चिन्ताजनक है। अगर, मौजूदा गति जारी रही तो 80 प्रतिशत देश, 2030 तक मातृत्व से जुड़ी मृत्यु दर को कम करने के लक्ष्य से पिछड़ जाएँगे, और हर तीन में से एक देश शिशु मृत्यु दर में कमी के लक्ष्य से भटक जाएगा।

गौरतलब है कि 7 अप्रैल 2025 को, विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शुरू हुआ ‘स्वस्थ शुरुआत, आशावान भविष्य’ अभियान, साल भर तक मातृ व नवजात मृत्यु दर को समाप्त करने और महिलाओं के दीर्घकालिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने पर ज़ोर देगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनीसेफ़ इस सप्ताह का आयोजन अनेक देशों के स्वास्थ्य मंत्रालयों और नागरिक संगठन एक साथ मिलकर आयोजित करते हैं। डब्ल्यूएचओ सक्रिय रूप से शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए पोषण के सर्वोत्तम स्रोत के रूप में स्तनपान को बढ़ावा देता है, और 2025 तक पहले 6 महीनों के लिए केवल स्तनपान की दर को कम से कम 50% तक बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *