सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि मुकदमे में देरी के नाम पर किसी व्यक्ति को अनिश्चित समय के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने इस संबंध में संविधान के अनुच्छेद 21 को किसी भी स्थिति में सर्वोपरि बताया।
सुप्रीम अदालत ने NDPS सहित UAPA एवं PMLA के तहत आरोपियों को जमानत देने के मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। बार एंड लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि देश में कोई भी कानून संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।
रिपोर्ट के मुताबिक़, अदालत का कहना है कि मुकदमे की सुनवाई में असामान्य देरी होने पर जमानत देने का आधार बन सकती है। इसके साथ ही अदालत ने NDPS, UAPA और PMLA जैसे सख्त विशेष कानूनों के तहत दर्ज मामलों में भी आरोपी के त्वरित सुनवाई के अधिकार से समझौता नहीं किए जाने की बात स्पष्ट रूप से रखी।
बेंच के अनुसार, किसी विशेष कानून को संविधान में दिए गए अधिकारों की सीमा तय करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानूनों की व्याख्या करते समय संविधान को ही मार्गदर्शक माना जाना चाहिए।
अदालत ने मूलभूत अधिकारों की पैरवी के साथ यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है और इस अधिकार को किसी विशेष कानून के नाम पर सीमित नहीं किया जा सकता।
रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने यह भी कहा कि NDPS एक्ट की धारा 37 जैसी सख्त जमानत शर्तें भी संविधान के अनुच्छेद 21 से ऊपर नहीं हैं। ऐसे में यहदि किसी आरोपी को लंबे समय तक मुकदमे का इंतजार करना पड़ता है और उसके त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन होता है, तो अदालत जमानत पर विचार कर सकती है।
पिछले फैसलों पर अदालत ने उठाए सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, पीठ ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश की टिप्पणियों पर सवाल उठाए। उस आदेश में कहा गया था कि NDPS जैसे विशेष कानूनों के मामलों में जमानत की सख्त शर्तों को केवल मुकदमे में देरी के आधार पर दरकिनार नहीं किया जा सकता।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कोर्ट ने मौजूदा सुनवाई में इस सोच पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मौलिक अधिकारों की व्याख्या ऐसी होनी चाहिए, जिससे उनका उद्देश्य सुरक्षित रहे और नागरिक उनका पूरा लाभ उठा सकें।
रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को इसलिए भी ख़ास माना जा रहा है क्योंकि मनी लॉन्ड्रिंग, मादक पदार्थों की तस्करी और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े मामलों में जमानत की शर्तें काफी सख्त हैं। ऐसे में PMLA, NDPS और UAPA के आरोपियों को जमानत मिलना मुश्किल हो जाता है। विभिन्न कानूनी अड़चनों के चलते सुनवाई में समय लगता है। जबकि आरोपी को देरी होने पर अनुच्छेद 21 के तहत राहत मिल सकती है।