भारत सहित दक्षिण पूर्व में जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाया प्रीमैच्योर जन्म का खतरा

जलवायु परिवर्तन की बदौलत गर्भावस्था के दौरान प्रीमैच्योर जन्म के मामलों में वर्दी हुई है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब महज़ बढ़ते तापमान, सूखे या बाढ़ तक सीमित नहीं रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार,क्लाइमेट चेंज का खतरा अब गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे बच्चों तक पहुंच चुका है। अप्रैल 2024 में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में पड़ी भीषण गर्मी के दौरान भारत, बांग्लादेश और फिलीपींस में समय से पहले बच्चों के जन्म यानी प्रीमैच्योर बर्थ के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।

रिपोर्ट बताती है कि, भारत सहित बांग्लादेश और फिलीपींस में अप्रैल 2024 की भीषण गर्मी के दौरान करीब 16,150 अतिरिक्त प्रीमैच्योर बच्चों के जन्म हुए हैं। इनमें से 10,600 मामलों को मानवजनित जलवायु परिवर्तन से जोड़ा गया है। वहीँ अकेले भारत में इससे जुड़े मामलों की संख्या 8,830 बताई जा रही है।

जेडसीए (Zero Carbon Analytics) की एक स्टडी से पता चला है कि इस दौरान होने वाले अतिरिक्त प्रीमैच्योर जन्मों में 10,600 ऐसे थे, जिनके लिए मानवजनित जलवायु परिवर्तन को ज़िम्मेदार माना गया है। स्टडी के दो अलग-अलग निष्कर्षों के बीच अंतर से जुड़ी जांच इस आंकड़े को स्पष्ट करने में सहायक है।

शोध के अनुसार, इन तीन देशों में अप्रैल 2024 की गर्मी में सामान्य अप्रैल की तुलना में लगभग 16,150 अतिरिक्त प्रीमैच्योर जन्म हुए। इनमें भारत में 3.6 प्रतिशत, बांग्लादेश में 11.9 प्रतिशत जबकि फिलीपींस में यह संख्या 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के संकेत देती है।

दूसरी तरफ 10,600 का आंकड़ा उन अतिरिक्त प्रीमैच्योर जन्मों का है, जिन्हें विशेष रूप से मानव गतिविधियों से हो रही ग्लोबल वार्मिंग के के परिणामस्वरूप माना गया है। यह बताता है कि भारत के 8,830, बांग्लादेश के 1,479 और फिलीपींस के 263 मामले तुलनात्मक रूप से इंसानों के कारण तापमान बढ़ोतरी से जुड़े हुए हैं।

रिपोर्ट के हवाले से, अध्ययन में खा गया है कि अप्रैल 2024 में पड़ने वाली भीषण गर्मी दक्षिण एशिया में मानवजनित जलवायु परिवर्तन के कारण लगभग 45 गुना अधिक संभावित थी। जबकि फिलीपींस में मानवजनित जलवायु परिवर्तन के बिना इस तरह की गर्मी की घटना लगभग असंभव थी।

प्रीमैच्योर जन्म को लेकर इस स्टडी का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू बताता है कि इस परिवर्तन का भार तीनों देशों में समान रूप से नहीं पड़ा है। भारत में बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड में देश के कुल अतिरिक्त प्रीमैच्योर जन्मों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा दर्ज होने का अनुमान है।

वहीँ बांग्लादेश में सबसे अधिक आबादी वाले ढाका और चटगांव में कुल अतिरिक्त मामलों का 47 प्रतिशत हिस्सा रहा। फिलीपींस में कैलाबारज़ोन में सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए जबकि इसके बाद मेट्रोपॉलिटन मनीला और सेंट्रल लूज़ोन रहे।

खबर से पता चलता है कि रिसर्चर ने भविष्य के तापमान अनुमानों के आधार पर भारत और बांग्लादेश में 2050 संबंधी प्रीमैच्योर बर्थ के संभावित भर का जो आकलन किया है, उससे जुड़ा अनुमान बताता है कि सदी के मध्य तक भारत में एक सामान्य अप्रैल के दौरान ही 15,000 से अधिक अतिरिक्त प्रीमैच्योर जन्म हो सकते हैं।

स्टडी के अनुसार, भारत में इस परिवर्तन से सबसे प्रभावित राज्य उत्तर प्रदेश होगा। इसके बाद बिहार और राजस्थान का नंबर होगा। वहीँ बांग्लादेश की बात करें तो सदी के मध्य तक यहाँ भी सामान्य अप्रैल में बढ़ते तापमान के कारण 1,500 अतिरिक्त प्रीमैच्योर जन्म होने की संभावना है। यहाँ ढाका सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है और उसके बाद चटगांव और राजशाही का नाम आता है।

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