इंडोनेशिया का जकार्ता शहर, 4.2 करोड़ की आबादी के साथ, विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या वाला नगर बन गया है। नए रुझान बताते हैं कि दुनियाभर में शहरी इलाक़ों में जनसंख्या का आकार बढ़ रहा है और समय बीतने के साथ इसमें तेज़ी आ रही है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, 8.2 अरब वैश्विक आबादी में से 45 प्रतिशत लोग अब शहरों में रह रहे हैं।

मंगलवार को आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के लिए यूएन कार्यालय (DESA) ने अपने एक नए विश्लेषण में बताया है कि वर्तमान स्थिति 1950 के उलट है, जब कुल 2.5 अरब वैश्विक आबादी में से केवल 20 प्रतिशत यानि 50 करोड़ लोग ही ही शहरों में बसे थे।
2025 से 2050 के दौरान कुल शहरी आबादी में क़रीब 98 करोड़ की बढ़ोत्तरी होने का अनुमान है, जिनमें से आधी संख्या, यानि 50 करोड़, केवल सात देशों के शहरी इलाक़ों में केन्द्रित होगी। ये स्तन हैं भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य, मिस्र, बांग्लादेश, इथियोपिया।
नए डेटा के अनुसार, 1975-2025 के दौरान विश्व भर में कुल शहरों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। 2050 तक, शहरों की संख्या 15 हज़ार के आँकड़े को पार कर जाने की सम्भावना है, जिनमें से अधिकाँश की आबादी ढाई लाख से कम होगी।
इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता, विश्व में सबसे बड़ी आबादी वाला शहर बन चुका है जहाँ 4.2 करोड़ निवासी बसे हैं। इसके बाद, ढाका (लगभग 4 करोड़), टोक्यो (3.3 करोड़), नई दिल्ली (3 करोड़), शंघाई (2.96 करोड़) का स्थान है. शीर्ष 10 शहरों में कोलकता (2.25 करोड़) नौंवे स्थान पर है।
महानगरों की बढ़ती संख्या
वर्ष 1975 में महानगरों की संख्या 8 थी, जोकि 2025 आते-आते 33 पहुँच चुकी है, जिनमें 19 एशिया क्षेत्र में हैं। महानगरों से तात्पर्य उन शहरी इलाक़ों से है, जहाँ एक करोड़ या उससे अधिक निवासी बसे हों। भारत में महानगरों की संख्या पाँच हैं, जबकि चीन में चार मेगासिटी हैं।
2050 में ऐसे महानगरों की संख्या बढ़कर 37 तक पहुँच जाने का अनुमान है, और अदीस अबाबा (इथियोपिया), दार ऐस सलाम (तंज़ानिया), हाजीपुर (भारत) और क्वालालम्पुर (मलेशिया) एक करोड़ आबादी के आँकड़े को पार कर सकते हैं।
भले ही महानगरों की संख्या बढ़ने का रुझान हो, मगर रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि असल में मेगासिटी की तुलना में छोटे और मध्यम-आकार के शहरों में कहीं अधिक संख्या में लोग रहते हैं, और उनकी आबादी तेज़ी से बढ़ रही है, विशेष रूप से अफ़्रीका व एशिया में।
ऐसे12 हज़ार शहरों का विश्लेषण किया गया, जिनमें 96 प्रतिशत की आबादी 10 लाख से कम थी, और 81 फ़ीसदी में 2.5 लाख से कम लोग बसे थे।
आबादी वृद्धि रुझानों में असमानता
लेकिन ऐसा नहीं है कि शहरों में हो रही बढ़ोत्तरी एक समान हो। जहाँ अनेक शहरों का विस्तार हो रहा है, वहीं अन्य की आबादी में गिरावट दर्ज की जा रही है।
कुछ देशों की आबादी बढ़ने के बावजूद, उनमें शहरों की संख्या घट रही है, जबकि ऐसे भी उदाहरण है, जहाँ राष्ट्रीय आबादी में गिरावट आ रही है, मगर उनके शहरों की संख्या बढ़ रही है।
जिन शहरों में आबादी का आकार घट रहा है, उनमें अधिकाँश की जनसंख्या 2.5 लाख से कम थी. इनमें एक-तिहाई चीन में और 17 प्रतिशत भारत में हैं। वहीं, विशाल शहरों, जैसेकि मैक्सिको सिटी (मैक्सिको) और चेन्गदू (चीन) में जनसंख्या में कमी आ रही है।
नगर व ग्रामीण इलाक़े
70 से अधिक देशों में नगर (कम से कम पाँच हज़ार निवासी) किसी बसी हुई आबादी का सबसे आम प्रकार है। 70 से अधिक देशों में यह देखा जा सकता है, जिनमें जर्मनी, भारत, युगांडा और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं।
ग्रामीण इलाक़ों में बसी हुई आबादी 62 देशों में सबसे आम प्रकार है, जबकि 1975 में 116 देशों में ऐसा था। जिनमें ऑस्ट्रिया, फ़िनलैंड, रोमानिया, चाड, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, मोज़ाम्बीक़, ज़ाम्बिया समेत अन्य देश हैं।
2050 तक इसमें और गिरावट आने की सम्भावना है, और यह 44 देशों तक सिमट सकती है। इस मामले में, सब-सहारा अफ़्रीका ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहाँ बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है।
