एनडीए का आखिरी पूर्णकालिक बजट सत्र आज से

आज यानी 31 जनवरी से वित्त वर्ष 2023-24 के लिए संसद का बजट सत्र शुरू हो रहा है। इसे राष्ट्रपति मुर्मू सम्बोधित करेंगी। ये सत्र 6 अप्रैल तक चलेगा। 66 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कुल 27 बैठकें होंगी। बजट 2023-24 पेपर लेस बजट है। इस बजट को प्रिंट नहीं किया जाएगा। पेपर लेस बजट की शुरुआत 2021-22 के बजट से हुई थी।

एनडीए का आखिरी पूर्णकालिक बजट सत्र आज से

2023-24 के बजट सत्र का पहला चरण 31 जनवरी से 14 फरवरी तक चलेगा। आज जनवरी को दोनों सदनों के संयुक्त बैठक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संबोधित करेंगी। इसी क्रम में पहली फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट पेश करेंगी।

इस सत्र में लोकसभा और राज्‍यसभा की संयुक्त बैठक को राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहली बार संबोधित करेंगी। संविधान के आर्टिकल 86 (1) में इसका प्रावधान है। बजट सत्र के पहले भाग के दौरान संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इसके बाद केंद्रीय बजट पर चर्चा होगी, इसमें प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस का जवाब देंगे। इसी क्रम में केन्द्रीय वित्त मंत्री बजट पर चर्चा का जवाब देंगी।

दो चरणों में प्रस्तुत किये जाने वाले इस साल के बजट सत्र का पहला चरण 31 जनवरी से 14 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद 14 फरवरी से 12 मार्च तक सामान्‍य अवकाश रहेगा। इस दौरान विभाग संबंधी संसदीय स्‍थायी समितियां अनुदानों की मांग की जांच और अपने मंत्रालयों तथा विभागों से संबंधित रिपोर्ट तैयार करेंगी। लगभग एक महीने के अवकाश के बाद बजट सत्र का दूसरा चरण 12 मार्च से शुरू होकर 6 अप्रैल तक चलेगा।

भाषण समापन पर बजट को सदन के समक्ष रखा जाता है। तत्पश्चात इसे राज्यसभा में पेश किया जाता है। बजट में सरकार द्वारा मांगे गए अनुदान में राज्यसभा को किसी प्रकार की कटौती का कोई अधिकार नहीं होता है।

इकोनॉमिक सर्वे
मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा तैयार इकोनॉमिक सर्वे एक ऐसा वार्षिक दस्तावेज है जिसे आम तौर पर बजट प्रस्तुत करने से ठीक एक दिन पहले संसद में पेश किया जाता है। इस आर्थिक सर्वेक्षण में देश की वर्तमान अर्थव्यवस्था का हिसाब-किताब होता है। ये बताता है कि देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति, विकास की रफ्तार, किस सेक्टर में कितना निवेश तथा कहाँ कितना निवेश किये जाने की ज़रूरत है।

इस आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर यह तय होता है कि आने वाले साल में देश की अर्थव्यवस्था का अनुमान प्रस्तुत करता है। इस आर्थिक सर्वेक्षण को संज्ञान में लेकर उसी के आधार पर आगामी योजनाओं की घोषणा की जाती है।

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