सोमवार को ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार चार एस्ट्रोनॉट्स ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल किया। इनकी कोशिशों की बदौलत अप्रैल 1970 में अपोलो 13 मिशन के दौरान बनाए गए 400,171 किलोमीटर के पिछले रिकॉर्ड को पार कर लिया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, मिशन अभी चांद से जुडी ख़बरों में कहा गया है कि उम्मीद है कि 23:07 जीएमटी पर यह धरती से लगभग 406,788 किलोमीटर की ज़्यादा से ज़्यादा दूरी तक पहुंचेगा।
आर्टेमिस II मिशन के दौरान, एस्ट्रोनॉट्स चांद के पास से गुज़रेंगे, 6 घंटे से ज़्यादा समय तक चांद की सतह पर चीज़ों को देखेंगे और डॉक्यूमेंट करेंगे, जिसके बाद ओरियन कैप्सूल फ्री रिटर्न ट्रैजेक्टरी पर धरती पर वापस आएगा, जिसमें लगभग 4 दिन लगेंगे।
एस्ट्रोनॉट्स ने अपने ऐतिहासिक दिन की शुरुआत दिवंगत एस्ट्रोनॉट जिम लोवेल के मैसेज से की, जिन्होंने अपोलो 8 और अपोलो 13 में हिस्सा लिया था। अपने मैसेज में उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक दिन है। बिज़ी शेड्यूल के बावजूद, नज़ारे का मज़ा लेना न भूलें। मेरे पुराने मोहल्ले में आपका स्वागत है। मुझे यह मिशन आपको सौंपते हुए गर्व हो रहा है।
जैसे ही वे चांद के दूसरी तरफ से गुज़रेंगे, एस्ट्रोनॉट्स उन जगहों को देखेंगे जिन्हें पहले इंसानी आँखों ने नहीं देखा था। मिशन के दौरान भेजी गई एक इमेज में चांद का बड़ा ओरिएंटल बेसिन दिखाया गया था, जिसे पहले सिर्फ़ बिना पायलट वाले मिशन के कैमरों से ही देखा जाता था।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मॉडर्न टेक्नोलॉजी के बावजूद, इंसानी आँख अभी भी सबसे अच्छा ऑब्ज़र्वेशन टूल है। आर्टेमिस II के लीड साइंटिस्ट केल्सी यंग के मुताबिक, इंसानी आँख के रिसेप्टर्स किसी भी कैमरे से कहीं बेहतर डिटेल देते हैं।
ह्यूस्टन में नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर के साइंस इवैल्यूएशन रूम में दर्जनों साइंटिस्ट एस्ट्रोनॉट्स से सीधे मिली जानकारी पर अपना ध्यान केन्दित किए हुए हैं, जिन्होंने अपनी ट्रेनिंग के दौरान चांद की अलग-अलग घटनाओं की डिटेल में स्टडी की है।
जानकारी में यह भी कहा गया है कि फ्लाईबाई के दौरान एस्ट्रोनॉट्स का चांद के पीछे से गुज़रते समय लगभग 40 मिनट के लिए पृथ्वी से संपर्क टूट जाएगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार, एस्ट्रोनॉट्स को चांद हाथ की दूरी पर रखे बास्केटबॉल के आकार का दिखाई देगा।
यह मिशन आर्टेमिस III और आर्टेमिस IV सहित भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए एक बड़ा कदम है, जिनका मकसद वहां के वातावरण को और करीब से जानना तथा चांद पर इंसानों की लैंडिंग कराना है।