सुपरमार्केट में मिलने वाले ज़्यादातर बेबी प्रोडक्ट सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं- रिसर्च

छोटे बच्चों को खाना खिलाना आसान काम नहीं है। समय और संसाधनों की कमी ने इन दिनों बाज़ार में पेरेंट्स की मदद के लिए कई प्रोडक्ट पेश किए हैं, लेकिन जानकारी से पता चला है कि अमरीका जैसे विकसित देश में किराने की दुकानों में मिलने वाले ज़्यादातर शिशु आहार वैश्विक मानक पोषण संबंधी दिशा-निर्देशों को पूरा करने में विफल रहे हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि लगभग हर परीक्षण किए गए प्रोडक्ट में भ्रामक दावे शामिल थे।

सुपरमार्केट में मिलने वाले ज़्यादातर बेबी प्रोडक्ट सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं- रिसर्च

एक नए अध्ययन में पाया गया है कि अमरीकी सुपरमार्केट में मिलने वाले शिशु उत्पाद अकसर सेहत के मामले में नुकसानदेह होते हैं। यहाँ किराना स्टोर में मिलने वाले लगभग दो तिहाई शिशु आहार विश्व स्वास्थ्य संगठन के पोषण संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं हैं।

अध्ययन में शामिल सभी उत्पादों में से 70 प्रतिशत उत्पाद प्रोटीन सामग्री के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों को पूरा नहीं करते थे जबकि 25 प्रतिशत उत्पाद कैलोरी मानकों को पूरा करने में नाकामयाब रहे।

इस शोध के लिए दस अमरीकी सुपरमार्केट की अलमारियों में 6 महीने से 36 महीने की उम्र के बच्चों के लिए मौजूद बिक्री के सामान की पड़ताल की गई।

जमा किए गए इन 651 खाद्य पदार्थों के नमूनों की जाँच से पता चला कि 60 प्रतिशत प्रोडक्ट शिशु और छोटे बच्चों के भोजन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी दिशानिर्देशों को पूरा करने में नाकाम पाए गए।

नमूनों की पड़ताल के दौरान इन विशेषज्ञों ने पाया कि विज्ञापित कोई भी शिशु आहार विश्व स्वास्थ्य संगठन के पूर्ण मानकों के अनुरूप नहीं है।

उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय में पोषण वैज्ञानिक और अध्ययन की प्रमुख लेखिका एलिजाबेथ डनफोर्ड ने एक बयान में कहा- “समय की कमी के कारण माता-पिता सुविधाजनक खाद्य पदार्थों का चयन कर रहे हैं, उन्हें इस बात का पता नहीं है कि इनमें से कई उत्पादों में उनके बच्चे के विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की कमी है और उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता है कि वे वास्तव में जितने स्वस्थ हैं, उससे कहीं अधिक स्वस्थ हैं।”

अध्ययन में शामिल सभी उत्पादों में से 70 प्रतिशत उत्पाद प्रोटीन सामग्री के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों को पूरा नहीं करते थे जबकि 25 प्रतिशत उत्पाद कैलोरी मानकों को पूरा करने में नाकामयाब रहे।

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