बच्चों पर गलत प्रभाव डालने वाले मेटा को तीन हजार करोड़ हर्जाना देना होगा

बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने के अपराध में मेटा को 375 मिलियन डॉलर जुर्माना अदा करना होगा। अमरीका में न्यू मैक्सिको कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए जूरी ने मेटा को बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने और खतरों को छिपाने का दोषी पाया है।

फैसला सुनते हुए चीफ जज ब्रायन बिडशाइड ने कहा कि मेटा ने अनुचित और भ्रामक व्यापारिक तरीके अपनाए और बच्चों की कमजोरियों का फायदा उठाया। जूरी ने यह भी माना कि कंपनी ने जानबूझकर ऐसा किया।

इसे एक ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है। फैसले में जूरी ने माना है कि मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा मुनाफे को प्राथमिकता दी। करीब सात हफ्ते चलने वाली सुनवाई के बाद जुड़ी ने यह फैसला सुनाया।

जूरी के मताबिक, कंपनी ने बच्चों के यौन शोषण संबंधित जोखिमों और मानसिक सेहत पर पड़ने वाले असर से जुड़ी गलत या भ्रामक जानकारी मुहैया कराई। साथ ही मेटा पर यह आरोप भी है कि इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म से बच्चों से जुड़े खतरों की जानकारी थी मगर इसे छिपाया गया।

जूरी ने मेटा पर कुल 37 हज़ार 5 सौ मामलों में दोष तय किए। हर उल्लंघन पर 5 हज़ार डॉलर का जुर्माना लगाया गया है। ऐसे में कुल हर्जाना लगभग 375 मिलियन डॉलर बनता है। भारतीय मुद्रा में यह राशि करीब 3,000 करोड़ रुपये बनती है।

इस फैसले को टेक कंपनियों के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, जिसमे बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज करने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है। गौरतलब है कि ऐसा ही एक अन्य केस कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में भी चल रहा है। इस केस में भी यह तय किया जाना बाकी है कि मेटा और यूट्यूब को जिम्मेदार ठहराया जाए या नहीं।

बताते चलें कि सोशल मीडिया के दुष्प्रभव को देखते हुए कई देशों ने इस पर सख्त क़दम उठाए हैं। जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के अलावा भारत में भी अब सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर एक्शन लिया जा रहा है।

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