देश के सामने इस समय बड़ी समस्याओं में से एक है कचरा प्रबंधन। इसमें भी औद्योगिक कचरे से निपटना एक बड़ी चुनौती है। कचरे के रिसाइकिल पर काम करते हुए हैदराबाद की मल्लिका रेड्डी गुणपति ने उम्मीद भरी एक राह सुझाई है। मल्लिका की इस अनोखी पहल का रास्ता बड़े फैशन प्लेटफॉर्म्स तक जाता है।

ई टीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि कचरे को पैदा होने से रोकना मुश्किल है, लेकिन इसे दोबारा इस्तेमाल (reuse) करना एक बड़ा बदलाव ला सकता है। इस कचरा निपटारे का विचार लाने वाली मल्लिका ने आर्किटेक्चर की डिग्री हासिल करने के बाद कुछ समय तक एक लैबोरेटरीज में काम किया, लेकिन उनकी असली रुचि पर्यावरण और स्थिरता के क्षेत्र में थी। मल्लिका के पिता जी वी प्रसाद, डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के चेयरमैन हैं और उनकी मां अनुराधा ‘सप्तपर्णी’ नाम का एक सांस्कृतिक केंद्र चलाती हैं।
नौकरी के दौरान उन्होंने करीब से देखा कि कितना ज्यादा कचरा पैदा हो रहा है, खासकर फार्मा पैकेजिंग और टेक्सटाइल के क्षेत्र में। इसने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि इस कचरे का सार्थक तरीके से दोबारा उपयोग कैसे किया जा सकता है। वह इस प्रयास में और भी लोगों को शामिल करना चाहती थीं, और इसी सोच के साथ उन्होंने 2019 में ‘कैंसिल्ड प्लांस’ (Cancelled Plans) नाम की एक संस्था शुरू की।
उन्होंने बताया, “इस नाम के पीछे का विचार बहुत सरल है। कुछ नया बनाने के लिए हमें पुरानी सोच को ‘कैंसिल’ (रद्द) करना होगा।” यह संस्था फार्मा पैकेजिंग और कपड़ों के ऐसे कचरे का उपयोग करने पर ध्यान देती है जो हानिकारक नहीं होते। उपयुक्त सामग्री इकट्ठा करने के लिए मल्लिका और उनकी टीम ने हैदराबाद के कई उद्योगों का दौरा किया। कई उद्योगपतियों ने इस प्रयास की सराहना की और उनका समर्थन करते हुए कहा कि वे हमेशा से कचरे का पुन: उपयोग करना चाहते थे, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि यह कैसे किया जाए।
मल्लिका का लक्ष्य कचरे को फैशन और होम डेकोर (घर की सजावट) के उत्पादों में बदलना था। हालांकि कुछ लोगों को लगा कि यह उनके आर्किटेक्चर बैकग्राउंड से अलग है, लेकिन मल्लिका का मानना था कि डिजाइन के सिद्धांत हर जगह लागू होते हैं. उनके लिए असली चुनौती कारीगरों को कचरे के साथ काम करने के लिए तैयार करना था. उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के साथ, पोचमपल्ली और पुराने शहर जैसे क्षेत्रों के कारीगर धीरे-धीरे इस प्रक्रिया में ढल गए।
उनके द्वारा बनाए गए उत्पाद संस्था की वेबसाइट, प्रदर्शनियों और अन्य स्थानों पर स्टालों के माध्यम से बेचे जाते हैं. बिजनेस को बेहतर ढंग से समझने के लिए मल्लिका ने लंदन के एक संस्थान से एमबीए भी पूरा किया।













