मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम तीन दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। इस यात्रा को दोनों देशों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और मलेशिया ने कई क्षेत्रों में पार्टनरशिप का भी ऐलान किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशिया के पीएम की मुलाकात से दोनों देशों के रिश्तों के और मजबूत होने की बात कही जा रही है। इस सफर में अनवर इब्राहिम ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात की।
‘इंडियन काउंसिल ऑफ़ वर्ल्ड अफ़ेयर्स’ में एक कार्यक्रम में शिरकत पर भारत में अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर बोलते हुए अनवर इब्राहिम का कहना था कि भारत भी धार्मिक मुद्दों से जूझ रहा है।
भारत और मलेशिया के रिश्ते ऐतिहासिक रहे हैं, मगर 2018 के बाद से मलेशिया के किसी प्रधानमंत्री की यह पहली भारत यात्रा है। भारत सरकार द्वारा साल 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किये जाने पर मलेशिया ने इसका विरोध किया था।
भारत में 2022 में प्रतिबंधित किये गए इस्लामिक स्कॉलर जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण के सवाल पर मलेशियाई प्रधानमंत्री का कहना था कि उन्हें नहीं लगता कि इस मुद्दे से दोनों देशों के रिश्तों पर असर होगा।
हालाँकि बतौर प्रधानमंत्री यह अनवर इब्राहिम की पहली भारत यात्रा है, मगर एक छात्र नेता और राजनेता के रूप में वह 1980 के दशक से ही भारत आते रहे हैं। एक छात्र नेता के रूप में 80 के दशक में वह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात कर चुके है जिसका ज़िक्र उन्होंने इस यात्रा में किया।
गौरतलब है कि भारतीय मूल के करीब 30 लाख लोग मलेशिया में रह रहे हैं। अनवर इब्राहिम ने दोनों देशों के मध्य रिश्ते सुधरने में पहल की है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने पर मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने विरोध किया था। इस पर रिश्तों में कड़ुवाहट आ जाने से भारत ने मलेशिया के पाम ऑयल का आयात रोक दिया था।