ज़ोरदार बारिश के बावजूद लखनऊ में शाही ज़रीह का जुलूस परंपरागत तरीके से उठा

लखनऊ। पहली मोहर्रम को ऐतिहासिक आसिफी इमामबाड़े से जरीह का जुलूस शाही शानो-शौकत के साथ मगर तेज़ बारिश में निकला । बारिश अगर थमी नहीं तो क्या हुवा शाही ज़रीह का जुलूस भी रुका नहीं, ज़ायरीन भी बारिश रुकने का इंतज़ार किये बग़ैर जरीह के जुलूस में शामिल होने के लिए पहुंच चुके थे .

जुलूस में हजारों लोगों ने शिकरत की क्योँकि बारिश तेज़ होने की वजह से दूर दूर से ज़ाएरीन के शिरकत करने में मुश्किल तो थी,
लेकिन आस पास से अक़ीदत मंदों का वह मजमा देखने को मिला जिसे देख कर ज़रा भी ये अंदाज़ नहीं हो रहा था कि ज़ाएर हुसैन अ0स0 ने तेज़ बारिश की भी परवाह नहीं की वह भीगते मातम करते शाही मोम की ज़रीह के जुलूस को तय शुदा वक़्त पे ले कर चलते रहे.

या हुसैन —- या हुसैन की सदा तेज़ बारिश में लखनऊ के मातम दारों ने हजरत इमाम हुसैन सहित कर्बला के 72 शहीदों का मातम किया। इस दौरान हर कोई काला लिबास पहने मातम कर रहा था। जुलूस से पूर्व इमामबाड़ा परिसर में मजलिस की गयी।

राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के अन्य डिस्ट्रिक्ट में गुरूवार को हुई मूसलाधार बारिश का असर शुक्रवार को भी दिखाई दिया। लखनऊ में दिन की शुरुआत हल्की ठण्ड के साथ हुई। दिन भर रुक- रुककर हवाएं चलने से तापमान में गिरावट आई और पारा 6 डिग्री से नीचे रिकार्ड किया गया।

-कई इलाकों की सड़कों पर पानी भर गया। कई जगहों पर लोगों को ट्रैफिक जाम की प्रॉब्लम से भी जूझना पड़ा। हालांकि, दिन भर तेज हवाएं चलने से मौसम में ठंडी बनी रही।


जुलूस में शाही बाजा, शहनाई, रौशन चौकी, सबील, सात हाथी और 10 ऊंट भी थे। हाथियों पर बैठे लोग हाथों में चांदी के शाह चिह्न ताज, शेर, सूरज और चांद लिए थे। इसके पीछे अमारी, ऊंट, काली झंडी, हरी झंडी, चांदी की नक्काशी झंडी, बल्लम, बरछी, जरीजे और मोर पंखी थी।

जुलूस में मातमी बैंड बज रहा था ‘हाय मारा गया मजलूम, वा वैला।’ जुलूस में हजरत इमाम हुसैन की सवारी का प्रतीक जुलजुनाह (घोड़ा) हजरत अब्बास के दो अलम के साथ दस अन्य अलम और ताबूत आदि शामिल थे। जुलूस के साथ अंजुमन शब्बीरिया नौहाख्वानी और सीनाजनी करती चल रही थी।

कई घंटे के बाद जुलूस छोटे इमामबाड़े पहुंचा

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