डिजिटल अरेस्ट मामले में लखनऊ कोर्ट ने सुनाई पहली सजा

उत्तर प्रदेश के एक डिजिटल अरेस्ट मामले में लखनऊ कोर्ट ने पहली सजा सुनाई है। अदालत ने साइबर ठग देवाशीष राय को जेल के साथ जुर्माने की भरपाई की सजा भी सुनाई है।

डिजिटल अरेस्ट मामले में लखनऊ कोर्ट ने सुनाई पहली सजा

यह उत्तर प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में पहली सजा है। लखनऊ की विशेष सीजेएम कस्टम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए होने वाली साइबर ठगी के पहले मामले में पहला ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आरोपी देवाशीष राय को सात साल की सजा और 68,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

यह मामला खनऊ की महिला डॉक्टर सौम्या गुप्ता से 85 लाख रुपये की ठगी का था, जिसमें आरोपी ने फर्जी सीबीआई और कस्टम अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट का जाल बना था।

गृह मंत्रालय के मुताबिक़, इस वर्ष करोड़ों रुपये की ठगी से जुड़ी डिजिटल अरेस्ट की
6,000 से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं।

लखनऊ की केजीएमयू लखनऊ की डॉक्टर सौम्या गुप्ता को बीते वर्ष 2024 में एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को कस्टम अधिकारी बताने के बाद दावा किया कि उनके नाम पर बुक किए गए कार्गो में जाली पासपोर्ट, एटीएम कार्ड और 140 ग्राम एमडीएमए (नशीला पदार्थ) पाया गया है।

ठगी के अगले पैंतरे को अपनाते हुए साइबर क्रिमिनल ने कॉल को एक फर्जी सीबीआई अधिकारी को ट्रांसफर किया। यहाँ डॉक्टर सौम्या को डराने-धमकाने के बाद 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। इस दौरान ठगों ने मानसिक दबाव बनाकर उनके बैंक खाते से 85 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।

लखनऊ के साइबर क्राइम थाने में डॉक्टर सौम्या ने पहली मई 2024 को शिकायत दर्ज कराई। त्वरित कार्रवाई करते हुए लखनऊ पुलिस ने मात्र पांच दिनों में ही आरोपी देवाशीष राय को गोमतीनगर विस्तार के मंदाकिनी अपार्टमेंट से गिरफ्तार कर लिया।

देवाशीष ने स्वीकार किया कि उसने फर्जी आईडी पर बैंक खाता खोला और सिम कार्ड हासिल किया था, जिसके जरिए इस ठगी को अंजाम दिया गया। पुलिस ने बैंक खातों में से छह लाख रुपये फ्रीज करा दिए और अगस्त 2024 में चार्जशीट दाखिल की।

इस मामले में विशेष सीजेएम कस्टम कोर्ट, लखनऊ ने रिकॉर्ड समय में सुनवाई पूरी करते हुए महज 438 दिनों में कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 419 (प्रतिरूपण), 420 (ठगी), 467/468/471 (जालसाजी) और आईटी एक्ट की धारा 66D (ऑनलाइन धोखाधड़ी) के तहत दोषी ठहराया।

कोर्ट ने 16 जुलाई 2025 को देवाशीष राय को सात साल की कठोर कारावास और 68,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इस फैसले को डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने साइबर अपराधियों के लिए सख्त संदेश बताया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *