केरल देश का पहला ऐसा राज्य बन गया जिसने एक रणनीतिक शहरी नीति बना ली है। आज केरल कैबिनेट ने स्थानीय स्वशासन विभाग की तैयार की गई शहरी नीति के ड्राफ्ट को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इसे अगले 25 सालों में राज्य के विकास को आगे बढ़ाने के मकसद वाला अहम फैसला माना जा रहा है।

इस ऐतिहासिक मंजूरी के साथ केरल भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने एक बड़ा शहरी रोडमैप बना लिया है। दरअसल यह पॉलिसी इस अनुमान पर आधारित है कि 2050 तक केरल 80 प्रतिशत शहरीकृत हो जाएगा, जिसकी पहचान ऊंचे इलाकों और तटीय इलाकों के बीच घनी आबादी वाले इलाकों में एक खास विकेन्द्रित शहरी फैलाव से होगी।
यह दस्तावेज शहरों को फैलाव के लिए एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का काम करता है। इसके तहत जलवायु परिवर्तन से पैदा हुई चुनौतियों को पहचानते हुए, खासकर पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील इलाकों में विकास मजबूत और टिकाऊ बना पर काम किया जाता है।
योजना में 2050 के केरल को “क्लाइमेट-स्मार्ट” शहरों और कस्बों के एक लगातार चलने वाले नेटवर्क के तौर पर देखा गया है, जो राज्य की विकेन्द्रित शासन और सहभागी योजना की विरासत से गहराई से जुड़ा है।
गौरतलब है कि यह पॉलिसी दो साल की कड़ी तैयारी का नतीजा है। इस की शुरुआत साल 2023-24 के राज्य बजट में हुई थी। इसमें दिसंबर 2023 में केरल अर्बन पॉलिसी कमीशन बनाना भी शामिल है, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल हैं।
मुख्यमंत्री को कमीशन की रिपोर्ट मार्च 2025 में जमा करने के बाद, पिछले सितंबर में कोच्चि में हुए एक इंटरनेशनल कॉन्क्लेव के दौरान ड्राफ्ट की दुनिया भर में बड़े पैमाने पर जांच हुई। इस पर दुनिया भर के मंत्रियों, मेयरों और शहरी योजनाकारों ने अपनी राय दी।
केरल सरकार का मकसद एक ऐसा मॉडल तैयार करना है जिसमे वैज्ञानिक योजना को अच्छे शासन के साथ जोड़कर ऊंचे स्तर वाली शहरी सुविधाएं देने के साथ इस बात का भी ध्यान रखे कि अलग इलाकों और सामाजिक तबकों में विकास संतुलित और बराबर बना रहे।
