स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता और नोबेल पीस प्राइज विजेता ग्रेटा थनबर्ग को इजरायल ने हिरासत में ले किया है। जिस जहाज़ को कब्ज़े में लिया गया है उसमे 11 और लोग भी सवार थे।

22 साल की स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग पहली जून 2025 को फिलीस्तीन के पक्ष में काम करने वाले संगठन फ्रीडम फ्लोटिला कोएलिशन (FFC) के जहाज मैडलीन पर सवार होकर गाजा के लिए रवाना हुईं थी।
11 और लोगों को लेकर निकले इस जहाज़ ने इटली के सिसिली के कटानिया बंदरगाह से अपना सफर शुरू किया था। गाजा के लोगों के लिए राहत सामग्री लेकर जा रहीं स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग आज गाजा तट पर पहुंचने वाली थीं।
इजरायल की 5 स्पीड बोट्स ने सोमवार तड़के जहाज को घेर लिया। इसके बाद सैनिकों ने जहाज पर चढ़कर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने गाजा फ्रीडम फ्लोटिला पर ड्रोन से हमला किए जाने और लोगों पर एक सफेद पदार्थ के छिड़काव की खबर दी है। इस छिड़काव से इन लोगों की त्वचा प्रभावित हुई है। साथ ही फ्लोटिला का संचार सिस्टम जाम होने की भी जानकारी सामने आई है।
इस जहाज को अब गाजा की जगह इजरायल ले जाया जा रहा है। मैडलीन नाम के इस जहाज पर सवार सभी 12 लोग इज़रायल सेना की हिरासत में हैं। ग्रेटा गाजा के पीड़ित लोगों के लिए दवा, अनाज, बच्चों के लिए दूध, डाइपर और वाटर प्यूरीफायर ले जा रही थीं।
बीबीसी द्वारा जारी एक खबर के मुताबिक़, इन सभी कार्यकर्ताओं को अशदोद पोर्ट ले जाया जा रहा है। यह इजराइल के पश्चिम में एक अहम पोर्ट है। गाजा से इसकी दूरी 27 किमी है।
खबर में कहा गया है कि इजरायल पहुंचने के बाद ग्रेटा थनबर्ग सहित सभी लोगों को हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले का वीडियो दिखाया जाएगा। सेना को यह आदेश रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने दिया है।
इजरायल सरकार की तरफ से इस बीच कहा गया था कि वह जहाज को गाजा में घुसने नहीं देंगे। आगे यह भी कहा गया कि जरूरत पड़ने पर इसे रोकने के अलावा जहाज़ में मौजूद लोगों को गिरफ्तार भी किया जा सकता है। इजरायल द्वारा धमकी दिए जाने के बाद जहाज पर मौजूद लोगों ने अमरीका और ब्रिटेन से मदद की गुहार लगाई भी।
बताते चलें कि ग्रेटा थनबर्ग एक स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता हैं। दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के खिलाफअभियान चलाने वाली ग्रेटा ने 2018 में स्वीडन की संसद के बाहर प्रदर्शन करना शुरू किया था और तब से वे जलवायु परिवर्तन पर तत्काल कार्रवाई के लिए विश्व नेताओं को चुनौती देने के लिए जानी जाती हैं।










