राष्ट्रपति रूहानी का भारत में दूसरा दिन, दुशमनों के ख़िलाफ़ इस्लामी जगत की एकता को बताया मूलमंत्र

ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी भारत की यात्रा पर हैं। गुरूवार की शाम डाक्टर रूहानी भारत के हैदराबाद नगर पहुंचे थे।

शुक्रवार को हैदराबाद की मक्का मस्जिद में नमाज़े जुमा अदा करने के बाद डाक्टर हसन रूहानी ने भाषण देते हुए कहा कि यदि दुनिया के मुसलमान एकजुट हो जाते तो अमरीका की यह हिम्मत न पड़ती कि बैतुल मुक़द्दस को ज़ायोनी शासन की राजधानी घोषित करता और ज़ायोनी शासन की इतनी हिम्मत न होती कि फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों का हर रोज़ हनन करता।

राष्ट्रपति रूहानी ने दुनिया में मुसलमानों के पास एकजुट हो जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि दूसरे लोग मुसलमानों का अपमान करना चाहते है जबकि पूरे इतिहास में मुसलमान ज्ञान, सभ्यता और वैभव के स्वामी रहे हैं और भविष्य मुसलमानों के हाथ में होगा।

राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने सभी मुस्लिम राष्ट्रों की मदद की है और मदद का यह सिलसिला बिल्कुल उसी तरह जारी रखना चाहता है जिस तरह इराक़, सीरिया और लेबनान की जनता की इस देश ने मदद की है।

डाक्टर रूहानी ने भौतिकवाद पर चोट करते हुए कहा कि भौतिकवादी सभ्यता दुनिया में शांति की स्थापना नहीं कर सकती, आज अमरीका में पश्चिमी सभ्यता का नतीजा जनसंहार और हर दिन स्कूलों में, युनिवर्स्टियों में तथा सड़कों पर हत्याओं के रूप में नज़र आता है।

ईरान के राष्ट्रपति ने भारत में मौजूद शांति व सुरक्षा के माहौल पर खुशी जताई और कहा कि दुशमन नहीं चाहते कि मुसलमान एकजुट रहें लेकिन भारत की जनता और ईरानी राष्ट्र ज्ञान और सभ्यता में समानता रखते हैं और एक दूसरे के साथ खड़े हैं।

राष्ट्रपति रूहानी का शनिवार को नई दिल्ली में औपचारिक स्वागत किया जाएगा।

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