ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर की अंतिम यात्रा शुक्रवार से जारी है। आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के ताबूत को उनके चार रिश्तेदारों के ताबूतों के साथ रखा गया है। खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में तेहरान में 3 जुलाई से शुरू हो गई हैं जो 9 जुलाई तक चलेगी। शुक्रवार के कार्यक्रम में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
सोमवार को तेहरान में होने वाले जुलूस के बाद ख़ामेनेई के ताबूत को मंगलवार को क़ोम ले जाया जाएगा। बुधवार को यह यात्रा इराक़ में एक महत्वपूर्ण शिया स्थल पर पहुंचेगी और उसके बाद गुरुवार को उन्हें उनके उत्तर-पूर्वी जन्मस्थान मशहद में दफ़न किया जाएगा। अंतिम संस्कार की रस्म मशहूर शिया धर्मगुरु जाफ़र सोभानी ने कराई। सोभानी 97 वर्षीय विद्वान हैं और वह पवित्र शहर क़ोम के धार्मिक मदरसों में पढ़ाते हैं।
ईरान के वर्तमान सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई के अपने पिता के जनाज़े में नज़र नहीं आने पर दुनियाभर के मिडिया में चर्चा रही। हालाँकि अली ख़ामेनेई के बाकी तीन बेटे, मसूद, मुस्तफ़ा और मैसम, तीनों ही रविवार को इस रस्म में शामिल हुए। उनके साथ राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख अहमद वाहिदी समेत कई अधिकारी भी मौजूद थे।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट ने इस बात को भी प्रमुखता से छापा है कि रविवार को लोग अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ नारे लगाते दिखे। हुजूम में लोग ‘हम बदला लेंगे’ जैसे नारे लिखे हुए बैनर भी पकड़े हुए थे। शोकसभा के दौरान ‘अमरीका मुर्दाबाद’ और ‘इसराइल मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोगों ने ऐसे बैनर थाम रखे थे जिनपर ‘किल ट्रंप’, ‘किल बीबी’ जैसे सन्देश लिखे थे। इन बैनर पर लिखे ‘बीबी’ से अभिप्राय इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से है। बीबीसी की एक खबर के मुताबिक़, कवि मोहम्मद रसूली ने नमाज़ से पहले एक कविता पाठ के दौरान कहा कि ‘अब ट्रंप की हत्या करना हम सबकी ज़िम्मेदारी है’।
अली खामेनेई की अंतिम यात्रा पहले ईरान के तेहरान, कोम से इराक के कर्बला, नजफ से होकर गुजरेगी। आखिर में 9 जुलाई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम यात्रा की रस्मों के बीच मोजतबा ख़ामेनेई का इन कार्यक्रमों से ग़ायब रहना कई सवाल खड़े कर रहा है। इस दौरान यह आशंका भी हैं कि इसराइल उन्हें भी निशाना बना सकता है।
ईरानी अधिकारी इसे ‘सदी का अंतिम संस्कार’ कह रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक़, इन रस्मों में 1.2 करोड़ से 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत से एक आधिकारिक और बहु-धार्मिक प्रतिनिधिमंडल ईरान गया है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के पूर्व राज्यपाल सैयद अता हसनैन कर रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का प्रतिनिधित्व करते हुए कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद भी इस शव यात्रा में शिरकत के लिए ईरान पहुंचे हैं। इसके अलावा पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती तथा भारत के सिख, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदायों के प्रमुख धार्मिक नेताओं का एक समूह भी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए ईरान पहुँचा। इनमें बड़ी संख्या में जर्नलिस्ट भी शामिल हैं।
बताते चलें कि 28 फरवरी 2026 को अमरीका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त रूप से किए हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्य मारे गए थे। इन हमलों में खामेनई समेत उनकी बेटी, दामाद, बहू और पोती की मौत हो गई थी। अब 4 महीने बाद उनको सुपुर्द-ए-खाक किया जा रहा है।
इस बीच न्यूज़ वेबसाइट एक्सियोस से मिली खबर में कहा गया गया है कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रमों की वजह से शांति वार्ता को एक हफ़्ते के लिए रोक दिया गया है।