ईरान-इसरायल टकराव से आम नागरिकों का संकट बढ़ता जा रहा है

ईरान-इसरायल युद्ध अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर रहा है। दोनों देश एक दूसरे पर मिसाइल व हवाई हमले जारी रखे हैं। इन हमलों से आम नागरिको को भारी नुक़सान पहुँच रहा है। युद्ध की आग में पूरे क्षेत्र के झुलसने का जोखिम बढ़ता जा रहा है।

ईरान-इसरायल टकराव से आम नागरिकों का संकट बढ़ता जा रहा है

मानवाधिकार मामलों के यूएन प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा है कि इसरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे व्यापक हमलों, और जवाब में ईरान द्वारा मिसाइल व ड्रोन हमलों से आम नागरिको को भीषण नुक़सान पहुँच रहा है और इसकी आग में पूरे क्षेत्र के झुलसने का जोखिम है।

मानवाधिकार मामलों के यूएन प्रमुख वोल्कर टर्क ने गुरूवार को दोनों देशों से अधिकतम संयम बरतने और अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का पालन किए जाने की अपील की है। हताहत होने वाले आम नागरिकों की बढ़ती संख्या पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए उन्होंने सामूहिक विस्थापन व क्षेत्रीय अस्थिरता के प्रति आगाह किया है।

अपने वक्तव्य में वोल्कर टर्क ने कहा है कि इसरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे व्यापक हमलों, और जवाब में ईरान द्वारा मिसाइल व ड्रोन हमलों से आम नागरिको को भीषण नुक़सान पहुँच रहा है और इसकी आग में पूरे क्षेत्र के झुलसने का जोखिम है।

उन्होंने अधिकतम संयम बरते जाने को बढ़ते टकराव के इस कुतर्क से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता बताया है। साथ ही उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का पूर्ण सम्मान किए जाने और अच्छी भावना के साथ वार्ता की मेज़ पर आने की बात भी कही।

13 जून क बाद से इसराइल और ईरान द्वारा हवाई हमलों, मिसाइल व ड्रोन हमलों में अब तक बुनियादी प्रतिष्ठानों को व्यापक क्षति पहुँची है और सैकड़ों लोगों की जान गई है.

इस युद्ध में इसरायल में अब तक 24 मौतों और 840 घायलों की जानकारी दी गई है। ईरान में स्वास्थ्य प्रशासन के अनुसार, अब तक कम से कम 224 लोग मारे गए हैं जबकि मृतकों का वास्तविक आँकड़ा इससे कहीं अधिक होने की आशंका है।

एक अनुमान के अनुसार, ईरान में 35 लाख शरणार्थी या शरणार्थी जैसी परिस्थितियों में रहते हैं, जिनमें 7.5 लाख से अधिक अफ़ग़ान नागरिक हैं। कुल 26 लाख लोगों के पास ज़रूरी दस्तावेज़ नहीं है। वर्तमान में लोग ईरान के भीतर अन्य हिस्सों और पड़ोसी देशों का भी रुख़ कर रहे हैं।

यूएन एजेंसी प्रवक्ता बाबर बलोच के अनुसार, हालात तेज़ी से बदल रहे हैं और रिपोर्टों की पुष्टि कर पाना सम्भव नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान में बड़ी संख्या में अफ़ग़ान शरणार्थी लम्बे समय से रह रहे हैं, लेकिन अब यहीं के लोगों को बर्बादी व भय का अनुभव करना पड़ रह है।

बाबर बलोच ने पड़ोसी देशों से आग्रह किया है कि शरण की तलाश में आने वाले हर व्यक्ति को संरक्षण मुहैया कराना होगा और उन्हें वापिस भेजने से बचा जाना होगा।

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