निवेशक भारतीय बाज़ार को लेकर सतर्क हैं

रिपोर्ट बताती है कि सर्वे के मुताबिक़, स्टॉक मार्केट वैल्युएशन के लिहाज़ से भारत वैश्विक स्तर पर पांचवें स्थान से गिरकर सातवें स्थान पर आ गया। भारतीय शेयर बाज़ार इस साल दुनिया के सबसे ख़राब प्रदर्शन करने वाले बाज़ारों में शामिल है और निवेशकों की चिंता बढ़ रही है।


भारत के शेयर बाज़ार में पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों का भरोसा कम होता नज़र आ रहा है। नतीजे में भारतीय शेयर बाज़ार इस साल एशिया के दूसरे बाज़ारों से पिछड़ गया है। इस समय भारत, इंडोनेशिया से भी ज़्यादा एशिया का सबसे कम पसंदीदा शेयर मार्किट बन गया है।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सिक्योरिटीज़ डिपॉज़िटरी एनएसडीएल के अनुसार, इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाज़ार से 26.4 अरब डॉलर से ज़्यादा की निकासी की है। इसके चलते इसी साल मई महीने में स्टॉक मार्केट वैल्युएशन के लिहाज़ से भारत वैश्विक स्तर पर पांचवें स्थान से गिरकर सातवें स्थान पर आ गया था।

सात से 13 अगस्त के बीच हुए इस सर्वे में 272 अरब डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन करने वाले कुल 98 फ़ंड मैनेजरों ने हिस्सा लिया। अमरीकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ‘सर्वे के नतीजे पिछले दो हफ़्तों में भारतीय शेयरों में आई गिरावट से भी मेल खाते हैं। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब कंपनियों की कमाई के अनुमान में सुधार हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि मज़बूत होते फंडामेंटल्स के बावजूद निवेशक भारतीय बाज़ार को लेकर सतर्क हैं।’

इस पिछड़ने पर विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी एक बड़ी वजह यह है कि एआई में निवेश के अवसर तलाश रहे निवेशक भारत में ऐसी कंपनियों की कमी से निराश हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीज़ें यहीं तक स्थिर नहीं रहीं। अब बैंक ऑफ़ अमरीका के फ़ंड मैनेजरों के सर्वे में भारत इंडोनेशिया से भी पीछे है। भारत अब इंडोनेशिया से भी ज़्यादा एशिया का सबसे कम पसंदीदा शेयर बाज़ार बन गया है।

रिपोर्ट बताती है कि सर्वे के मुताबिक़, भारतीय शेयरों को लेकर सबसे बड़ी चिंता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी अच्छी कंपनियों का अभाव है। इसके बाद कमज़ोर आर्थिक वृद्धि सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है। यह ऐसे समय में हुआ है, जब भारतीय शेयर बाज़ार इस साल दुनिया के सबसे ख़राब प्रदर्शन करने वाले बाज़ारों में शामिल है और निवेशकों की चिंता बढ़ रही है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश में युवा अवसरों की कमी से जूझ रहे हैं। भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है। अनुमान के मुताबिक़, 15 से 29 साल की उम्र के क़रीब 37 करोड़ युवा देश में हैं।

पिछले महीने बड़ी संख्या में युवाओं ने सड़कों पर उतरकर अपना असंतोष ज़ाहिर किया था। जेन ज़ी के इन प्रदर्शनों की शुरुआत पेपर लीक के एक मामले को लेकर ग़ुस्से से हुई थी। कुछ ही हफ़्तों में यह आंदोलन व्यापक असंतोष की अभिव्यक्ति बन गया था। युवाओं को लगता है कि देश का राजनीतिक नेतृत्व उनकी चिंताओं और आकांक्षाओं को नज़रअंदाज़ कर रहा है।

सर्वे में शामिल 32 प्रतिशत फ़ंड मैनेजरों ने भारतीय शेयर बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी घटाने का रुख़ जताया है। इसके अलावा सुधारों की कमी और शेयरों की ऊंची क़ीमत भी निवेशकों के नकारात्मक रुख़ की प्रमुख वजहों में शामिल हैं।

शेष का जायज़ा लेने पर पता चलता है कि ताइवान और जापान अब भी निवेशकों के सबसे पसंदीदा बाज़ार हैं। इसके उलट, इंडोनेशिया के हवाले से निवेशकों के रुख़ में सुधार है। जुलाई में जहाँ 32 प्रतिशत फ़ंड मैनेजर इंडोनेशियाई बाज़ार में हिस्सेदारी कम करने की बात कर रहे थे, वहीं अगस्त में यह आंकड़ा घटकर 27 प्रतिशत रह गया।

बैंक ऑफ अमरीका के सर्वे में भारतीय शेयर बाज़ार को आख़िरी बार मई में सबसे कम पसंदीदा बाज़ार बताया गया था। उस समय अमरीका-ईरान युद्ध के बाद वैश्विक कच्चे तेल की क़ीमतों में तेज़ी से भारत की आर्थिक वृद्धि पर दबाव बढ़ा था। संघर्ष के समाधान के कोई संकेत नहीं मिलने के कारण ऊर्जा की क़ीमतें एक बार फिर बढ़ रही हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो रहा है।

रिपोर्ट बताती है कि हालांकि निफ़्टी 50 मार्च के हालिया निचले स्तर से आठ फ़ीसदी चढ़ चुका है लेकिन इस साल यह अब भी एशिया के प्रमुख शेयर बाज़ारों में दूसरा सबसे ख़राब प्रदर्शन करने वाला बाज़ार है।

साल की शुरुआत से इसमें करीब आठ फ़ीसदी की गिरावट आई है। इसके साथ ही भारतीय बाज़ार के लगातार 10 साल की वार्षिक बढ़त के ऐतिहासिक सिलसिले के टूटने की संभावना भी बढ़ गई है।

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