भारत की सबसे बड़ी जलवायु घड़ी का अनावरण

इस बार के पृथ्वी दिवस को जाकरूकता से जोड़ने के लिए जो विशेष क़दम उठाया गया है उसका श्रेय जाता है सीएसआईआर को। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद यानी सीएसआईआर ने जलवायु परिवर्तन जागरूकता पर बढ़ावा देते हुए नई दिल्ली में देश की सबसे बड़ी जलवायु घड़ी का अनावरण किया है।

भारत की सबसे बड़ी जलवायु घड़ी का अनावरण

सीएसआईआर की स्थापना 1942 में हुई और ये विविध वैज्ञानिक अनुसंधान में सहयोग करता है। पृथ्वी दिवस के अवसर पर सीएसआईआर ने नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में भारत की सबसे बड़ी जलवायु घड़ी का अनावरण किया।

इस आयोजन के ज़रिये ऊर्जा साक्षरता पर बात हुई और जलवायु परिवर्तन और इसके बुरे प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने पर ज़ोर दिया गया।

जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में जागरूकता से जुड़ी ये पहल जलवायु परिवर्तन और इसके बुरे प्रभावों के बारे में सचेत करने के साथ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से किया गया है।

ऊर्जा साक्षरता की बात करते हुए इस अवसर पर आईआईटी- बॉम्बे के प्रोफेसर और एनर्जी स्वराज फाउंडेशन के संस्थापक चेतन सिंह सोलंकी का कहना था कि देश के प्रत्येक नागरिक को इसकी जानकारी होनी चाहिए।

साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि आज के वातावरण में हर एक नागरिक को ऊर्जा साक्षर होने की तत्काल जरूरत है। अपने सम्बोधन में चेतन सिंह सोलंकी ने कहा कि हर एक नागरिक को यथा संभव ऊर्जा के उपयोग से बचने या कम करने के लिए कदम उठाने चाहिए।

इस अवसर पर सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने अपने सम्बोधन में कहा कि पृथ्वी दिवस हमारे लिए पर्यावरण की रक्षा के लिए एक अनुस्मारक है। आगे उन्होंने बताया कि सीएसआईआर-एनर्जी स्वराज फाउंडेशन समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत सीएसआईआर में बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने ऊर्जा साक्षरता प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

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