संसद का मानसून सत्र आज से प्रारम्भ हो रहा है। इस दौरान मणिपुर हिंसा का मुद्दा विपक्ष की फेहरिस्त में सबसे ऊपर है। इसके अलावा बढ़ती महंगाई और दिल्ली अध्यादेश सहित कई अन्य मुद्दों पर भी केंद्र सरकार विपक्ष के निशाने पर है।

मानसून सत्र 11 अगस्त तक चलेगा। संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लादजोशी ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान संसद में 31 विधेयक पेश किए जाएंगे। सरकार इस सत्र में दिल्ली अध्यादेश, डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण, वन संरक्षण संशोधन सहित 31 विधेयक पेश करेगी।
संसद का मानसून सत्र आज से: मणिपुर हिंसा पर हंगामे के आसार, सरकार दिल्ली अध्यादेश सहित 31 बिल पेश करेगी#ParliamentMonsoonSession #Delhi https://t.co/TscZcdOAWJ pic.twitter.com/veqi61RAjJ
— Dainik Bhaskar (@DainikBhaskar) July 20, 2023
बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सर्वदलीय बैठक में सभी पार्टियों से जन सरोकार से जुड़े मुद्दे उठाने तथा विधेयकों पर सार्थक चर्चा की अपील की है। दूसरी ओर विपक्ष भी इन मुद्दों के ज़रिये सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है।
मानसून सत्र से एक दिन पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक में संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने ने बयान दिया है। उनका कहना है कि सरकार मानसून सत्र में मणिपुर सहित सभी मुद्दों पर चर्चा कराने के लिए तैयार है, बशर्ते कि वे नियमों के तहत और अध्यक्ष से स्वीकृत हों।
संसद का मानसून सत्र आज से, मणिपुर हिंसा और केंद्र के अध्यादेश को मुद्दा बना सकता है विपक्ष#Monsoonsessionhttps://t.co/n6FD5yO7y4
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इसके जवाब में कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने संसद की कार्यवाही सुचारू तरीके से चलने की मांग की है। चौधरी ने कहा कि ताली दोनों हाथों से बजती है और अगर सरकार चाहती है कि संसद की कार्यवाही सुचारू तरीके से चले तो उसे विपक्ष की मांगें माननी पड़ेंगी।
विपक्ष की तरफ से मणिपुर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान की मांग पर प्रह्लाद जोशी ने बताया कि सरकार जब चर्चा के लिए तैयार है, तब इस तरह की मांग संसद में व्यवधान पैदा करने की चेतावनी देने जैसा है। आगे उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय पूर्वोत्तर राज्यों के मुद्दे पर नोडल मंत्रालय है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा, चिकित्सा उपकरण और सौंदर्य प्रसाधनों को विनियमित करने के लिए एक नया विधेयक तैयार किया है,सरकार दवा लाइसेंस को विनियमित करने का अधिकार पूरी तरह से राज्य सरकार के हवाले नहीं रखना चाहती है। इसमें केंद्रीय नियामक संगठन का भी हस्तक्षेप की बात कही जा रही है। ऐसे में दवा लाइसेंस को विनियमित करने में केंद्र अपना हस्तक्षेप चाहती है। इस मानसून सत्र में ये भी प्रस्तुत किया जायेगा।













