दैनिक स्थापना नियमावली से बंद हो जायेंगे अस्पताल, जनता पर पड़ेगा सीधा असर-आईएमए

लखनऊ। अब गरीबों और आम जनता को इलाज के लिए दर-ब-दर भटकना पड़ सकता है। ये खबर गरीबों और आम जनता के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के लिये भी है, जहां प्राथमिक इलाज भी मुश्किल से मिलता है। सरकार ने दैनिक स्थापना नियमावली 2016 की अधिसूचना जारी कर दी है। आईएमए का मानना है कि ये एक जनविरोधी नियम है। जिससे प्रदेश के कई अस्पताल बंद हो सकते हैं। जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा।

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इस एक्ट के लागू होने के बाद चिकित्सा शिविर या कैंप लगाना असंभव हो जायेगा। क्योंकि सभी चिकित्सा संस्थानों को सरकार में पंजीकरण कराना जरूरी होगा। अपंजीकृत जगह पर चिकित्सा प्रदान करने को गैरकानूनी माना जायेगा।

आईएमए का कहना है कि ये एक्ट पश्चिमी देशों के मानकों के आधार पर बनाया गया है। इसका असर ये होगा कि जब मेडिकल संस्थान बंद होंगे तो इलाज मंहगा हो जायेगा।

ऐसे में  इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 12 जुलाई को  दैनिक स्थापना (रजिस्ट्रीकरण और विनिमय) नियमावली, 2016 की अधिसूचना को जनविरोधी अधिनियम मानते हुए आगामी 30 जुलाई को पूरे प्रदेश में विरोध दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया है। आईएमए इस एक्ट से होने वाले नुकसान के बारे में जनजागरण अभियान भी शुरू करेगा।

आईएमए की ये मांग है कि एकल क्लीनिक को उपरोक्त एक्ट से बाहर रखा जाए। क्योंकि, एकल क्लीनिक देश में प्रदान किए जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ की हड्डी है तथा 70 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवायें इन्हीं एकल क्लीनिक द्वारा प्रदान की जाती है। प्रदेश सरकार द्वारा लागू किए गए उपरोक्त मापदण्ड इन क्लीनिकों पर थोपने से आम जनता के लिए स्वास्थ्य सेवायें और और महंगी हो जाएंगी।

 

एक्ट में मुख्यत: जिन बातों को आईएमए जनविरोधी मानता है उनमें मुख्य यह है कि  एक्ट के अनुसार प्रत्येक चिकित्सा संस्थान को सरकार से पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। अपंजीकृत संस्थानों को एक्ट में गैरकानूनी माना जाएगा।

दूसरे ये कि ये एक्ट पश्चिमी देशों के मानकों के आधार पर बनाया गया है। जिसके अनुसार सभी अस्पतालों में मान्यता प्राप्त नर्सों तथा अन्य चिकित्सा सेवाकर्मी को रखना अनिवार्य होगा। जबकि, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्रायोजित सर्वेक्षण के अनुसार मिले आंकड़ों से साफ़ हो चुका है कि चिकित्सा कर्मियों, नर्सों की बेहद कमी है।

गौरतलब है कि भारत में अस्पताल शुरू करने के लिए लगभग 2 दर्जन लाइसेंस और अनुमतियों को प्राप्त करना होता है। ऐसे में एक और लाइसेंस व एक्ट फिर से इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा देगा। देश में ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं बदतर हालत में हैं। सरकार इन इलाकों में चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं देती है। सरकार जिस तरह पिछड़े इलाकों में उद्योग लगाने को प्रोत्साहित करती है, उसी तरह स्वास्थ्य सेवा के लिए भी जनता की मूलभूत जरूरत के लिए भी विचार करे।

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