अगर आवाजें आपको घबराहट और गुस्से का शिकार बनाती हैं तो यह मिसोफोनिया है

मिसोफोनिया एक श्रवण प्रतिक्रिया विकार है, जिसमें व्यक्ति को कुछ विशेष ध्वनियों के प्रति तीव्र नकारात्मक प्रतिक्रिया होती है। ये ध्वनियां आमतौर पर किसी के चबाने, सांस लेने, पेन से लिखने या यहां तक कि घड़ी की टिक-टिक जैसी रोजमर्रा की आवाजें हो सकती हैं। इन ध्वनियों से प्रभावित व्यक्ति में गुस्सा, घृणा, बेचैनी या मानसिक अशांति जैसी प्रतिक्रियाएं देखी जाती हैं।

अगर आवाजें आपको घबराहट और गुस्से का शिकार बनाती हैं तो यह मिसोफोनिया है

आपके आस-पास पैदा होने वाली आवाजें अगर आपको तनाव, गुस्से और घबराहट का शिकार बनाते हैं तो इसका मतलब हुआ कि आप मिसोफोनिया (misophonia) की गिरफ्त में हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है जो अब चिकित्सा विज्ञान के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस विकार से जीवनभर में पांच में से एक व्यक्ति प्रभावित होता है। इसके प्रति जागरूकता से न सिर्फ इसकी पहचान बल्कि इलाज भी संभव है।

मिसोफोनिया एक ऐसा श्रवण प्रतिक्रिया विकार (auditory response disorder) है, जिसमें व्यक्ति को कुछ विशेष ध्वनियों के प्रति तीव्र नकारात्मक प्रतिक्रिया होती है। अकसर ये ध्वनियां किसी के चबाने, सांस लेने, पेन से लिखने या यहां तक कि घड़ी की टिक-टिक और पंखे आदि की घरघराहट से हो सकती हैं। इन ध्वनियों के असर से गुस्सा, बेचैनी या उलझन जैसी मानसिक अशांति देखी जाती हैं।

यूनिवर्सिटी का न्यूकेस्टल का एक अध्ययन बताता है कि मिसोफोनिया वाले लोगों के मस्तिष्क में ऑडिटरी और इमोशनल प्रोसेसिंग सेंटर के बीच अधिक संपर्क होता है।

श्रवण प्रतिक्रिया विकार को सबसे पहले वर्ष 2000 में डॉक्टर पावेल जास्त्रेबॉफ ने परिभाषित किया था। वैसे तो 20वीं सदी की कई मनोवैज्ञानिक रिपोर्टों में इसका उल्लेख है।

एक्सपर्ट के मुताबिक़, मिसोफोनिया के लक्षणों की तीव्रता व्यक्ति की ध्वनियों पर प्रतिक्रिया के प्रकार से निर्धारित होती है।भावनात्मक प्रतिक्रिया में चिड़चिड़ापन,गुस्साऔर घबराहट सामने आती है। इसमें दिल की धड़कन तेज होना और मांसपेशियों में तनाव पैदा होने जैसी समस्या सामने आती है।

मिसोफोनिया से पीड़ित लोग ऐसी आवाज़ों वाली जगह से हटने का प्रयास करते हैं या फिर इनमें आंखों को बंद करने से लेकर क्रोध भरी तीव्र प्रतिक्रिया तक देखि जा सकती है।

हालाँकि इस बारे में अभी तक वैज्ञानिक रूप से कोई स्पष्ट जैविक वजह तय नहीं की गई है, लेकिन न्यूरोलॉजिकल रिसर्च से संकेत मिलते हैं कि ब्रेन में ध्वनि को प्रोसेस करने वाले हिस्से के बीच असामान्य जुड़ाव इसकी एक वजह हो सकता है।

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