इस वर्ष हिंदी पत्रकारिता अपनी 200वीं वर्षगांठ मना रही है। देश का पहला हिंदी समाचार पत्र ‘उदन्त-मार्त्तण्ड’ था और इसकी शुरुआत आज ही के दिन हुई। पंडित जुगल किशोर शुक्ल के सम्पादन में 30 मई 1826 को कलकत्ता से इसका प्रकाशन हुआ था।
आर्थिक समस्याओं के कारण इस समाचार पत्र का प्रकाशन दिसंबर 1827 में बंद करना पड़ा और इस तरह इसका प्रकाशन करीब 16 महीने तक ही हो सका। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में 30 मई को प्रत्येक वर्ष हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है।
इस दो सदी के सफर में हिंदी पत्रकारिता इंदौर के ऐतिहासिक योगदान की चर्चा ज़रूरी है। आधुनिक इतिहास बताता है कि ‘उदन्त-मार्त्तण्ड’ के 22 वर्ष 9 माह के बाद साल 1849 में होल्कर रियासत से ‘मालवा अखबार’ शुरू हुआ। इस अखबार की बदौलत मालवा क्षेत्र में पत्रकारिता की नींव रखी गई।
इसका परिणाम यह हुआ कि होल्कर रियासत का इतिहास अब शासन और प्रशासन की सरहदे पार करता हुआ शिक्षा, जनकल्याण और जनसंचार के क्षेत्र में आगे बढ़ा और महत्वपूर्ण योगदान दिया। मल्हारराव होल्कर से लेकर आखिरी शासक यशवंतराव होल्कर द्वितीय के समय तक करीब 220 वर्षों के शासनकाल में कई लोकहितकारी कार्य किए गए।
प्रारम्भ में जहाँ धार्मिक और नैतिक शिक्षा के कुछ निजी केंद्र संचालित थे वहीँ बाद में मराठी और हिंदी की पाठशालाएं भी शुरू हुईं। साल 1841 में हरिराव होल्कर ने पाश्चात्य शिक्षा का पहले स्कूल की बुनियाद डाली। क्यूंकि उस समय साक्षरता दर बेहद कम थी और शिक्षित लोग मुख्य रूप से सरकारी कार्यों में नियुक्त थे। होल्कर रियासत ने इन हालात में राज्य की नीतियों, सूचनाओं और समाचारों को जनता तक पहुंचाने के उद्देश्य से अपना पहला समाचार पत्र ‘मालवा अखबार’ शुरू किया।
हिंदी के पहले समाचार पत्र ‘उदन्त-मार्त्तण्ड’ के प्रकाशन के लगभग 22 वर्ष 9 माह बाद, 6 मार्च 1849 को इंदौर से ‘मालवा अखबार’ का प्रकाशन शुरू हुआ। शुरुआत में प्रत्येक मंगलवार को प्रकाशित होने वाले इस अख़बार के संपादक धर्मनारायण थे। इसमें पहले पृष्ठ पर दाईं ओर हिंदी और बाईं ओर उर्दू में समाचार प्रकाशित किए जाते थे। बाद में इसका प्रकाशन बुधवार और फिर शुक्रवार को होने लगा।
वर्ष 1853 में इसका संपादन प्रेमनारायण ने संभाला। प्रकाशन के शुरूआती दिनों में इसकी प्रसार संख्या 108 प्रतियां थी। वर्ष 1850 में यह 95, 1851 में 90 और 1854 में बढ़कर 105 प्रतियां दर्ज की गई। ‘मालवा अखबार’ लिथो प्रेस में छपता था और इसकी कीमत चार आना थी।
शुरुआती दौर में ‘मालवा अखबार’ में किस्सों की शैली में सामग्री प्रकाशित होती थीं। इसमें राजा, महाराजा और नवाबों से जुड़ी खबरों को प्रमुखता दी जाती थी। साल 1851 में इस अखबार ने वार्षिक समीक्षा प्रकाशित करना भी शुरू किया। इसमें होल्कर, सिंधिया और पवार शासकों के परिवारों का इतिहास कई किस्तों में प्रकाशित हुआ।
‘मालवा अखबार’ का प्रभाव यह हुआ कि इंदौर में अन्य पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन भी धीरे-धीरे ज़ोर पकड़ता गया।
वर्ष 1852 में ‘दिल्ली-ए-अखबार’ साप्ताहिक का प्रकाशन।
1861 में ‘पूर्ण चंद्रोदय’ का प्रकाशन।
1863 में मराठी साप्ताहिक ‘वृत लहरी’ का प्रकाशन।
1873 में ‘इंदौर स्टेट गजट’ का प्रकाशन।
वर्ष 1875 से 1878 तक ‘मालवा अखबार’ मराठी साप्ताहिक के रूप में भी प्रकाशित हुआ।