आज के समय में साइबर हमले संगठित आपराधिक नैटवर्कों द्वारा संचालित बड़े पैमाने के अभियान बन चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसम्बर 2024 में साइबर अपराध के इतिहास को नया रूप देते हुए, साइबर अपराध के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन को अपनाया था, जो दो दशकों से भी अधिक समय में आपराधिक न्याय पर पहली अन्तरराष्ट्रीय सन्धि है।

इस दस्तावेज़ को अपनाए जाने से पहले, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच पाँच वर्षों तक बातचीत चली थी, जिसमें विशेषज्ञों, नागरिक समाज, शिक्षा जगत और निजी क्षेत्र की भागीदारी थी।
एआई के ज़माने में इंटरनेट इंटरनेट की बदौलत अपराध इतना आसान बन चुका है, कि इसमें मानवीय हस्तक्षेप की ज़रूरत बहुत कम होती है। साथ ही अपराधी बड़ी तेज़ी से और बड़े पैमाने पर वारदात अंजाम दे डालते हैं।
भारत में भी साइबर फ्रॉड की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के मुताबिक, हर रोज 6000 से भी ज्यादा लोग साइबर अपराधियों के शिकार बन रहे हैं।
नई तकनीकों का दुरुपयोग हर तरफ आम है और हर दिन बढ़ रहा है। स्वचालित साइबर हमलों और डीप-फ़ेक तकनीक से बनाई गई नक़ली तस्वीरों से लेकर, दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा उन्नत ‘फ़िशिंग’ (Phishing) अभियानों तक की वारदातें साइबर अपराध रोकथाम की पारम्परिक प्रणालियों के लिए चुनौती बन रहा है।
एक जानी पहचानी या मशहूर ब्रांड की फ़र्ज़ी वेबसाइट बनाकर उपभोक्ता को जाल में फसाने को फिशिंग (Phishing) कहा जाता है। इन ग्राहकों को ईमेल के माध्यम से अपने पासवर्ड या वित्तीय जानकारी देने के लिए धोखा दिया जाता है।
“फ़िशिंग किट” का उपयोग करके इस समय अनुभवहीन अपराधी भी कई प्रमुख ब्रांड वैबसाइटों की वास्तविक नज़र आने वाली नक़ली वैबसाइट तुरन्त बना सकते हैं और बेहद विश्वसनीय नज़र आने वाले ऐसे सन्देश भेजते हैं कि उपभोक्ता उनके शिकार हो जाते हैं और अपना बड़ा नुकसान करते हैं।
डार्क वैब पर हाल के वर्षों में चुराए गए अरबों यूज़रनेम और पासवर्ड के समन्वय आँकड़े प्रस्तुत हुए हैं। इस डेटा का इस्तेमाल तथाकथित credential-stuffing हमलों में किया जाता है, जिसमें एक साथ हज़ारों वेबसाइटों पर स्वचालित लॉगिन करने के प्रयास शामिल होते हैं।
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, साइबर अपराध के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन को अपनाए जाने को, ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के वैश्विक प्रयासों में “एक निर्णायक क़दम” मानते हैं।
25 अक्टूबर को, वियतनाम के हनोई में एक आधिकारिक समारोह में इस कन्वेंशन को सदस्य देशों के हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह सन्धि 40 देशों से समर्थन मिलने के 90 दिन बाद क़ानूनी रूप से लागू हो जाएगी।
साइबर अपराध से निपटने के लिए यह नया दस्तावेज़ एक साझा अन्तरराष्ट्रीय ढाँचा स्थापित करता है। यह पीड़ितों की सहायता के लिए एकीकृत परिभाषाएँ, जाँच मानक और तंत्र प्रस्तुत करता है- जिसमें मुआवज़ा, क्षतिपूर्ति और अवैध सामग्री को हटाना शामिल है।
देश इन उपायों को अपने राष्ट्रीय क़ानूनों के अनुसार, लेकिन सहमत अन्तरराष्ट्रीय सिद्धान्तों के भीतर लागू करेंगे। उम्मीद है कि इस सन्धि के साथ एक नए युग की शुरुआत होगी, जिसमें वैबसाइट के पते (URL) में एक ग़लत अक्षर, उपभोक्ता की सारी जमा पूंजी एक झटके में नहीं छीन सकेंगे।
संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स व अपराध निरोधक कार्यालय (UNODC), दुनिया भर के देशों को, प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करके, साइबर अपराध के प्रति संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई का नेतृत्व करता है।
वियना स्थित यह एजेंसी, आपराधिक न्याय प्रणालियों पर अपनी विशेषज्ञता का उपयोग, रोकथाम और जागरूकता बढ़ाने, विधाई सुधार, क़ानून लागू करने की क्षमताओं में सुधार, अन्तरराष्ट्रीय सहयोग, फोरेंसिक सहायता के साथ-साथ, साइबर अपराध पर डेटा संग्रह, अनुसन्धान और विश्लेषण में तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए करती है।







