एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि फ्रेंच फ्राइज़ खाने से टाइप 2 मधुमेह का खतरा 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।अध्ययन के सह-लेखक का कहना है कि आपके आहार में छोटे-छोटे बदलाव भी आपके स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर फ्रेंच फ्राइज़ की जगह साबुत अनाज वाली ब्रेड और ब्राउन राइस जैसे स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ खाए जाएँ, तो न केवल रक्त शर्करा का स्तर संतुलित रह सकता है, बल्कि बीमारी का खतरा भी कम हो सकता है।
आलू में फाइबर, विटामिन सी और मैग्नीशियम सहित कई पोषक तत्व होते हैं, लेकिन इनमें स्टार्च की मात्रा भी अधिक होती है और इसलिए इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी अधिक होता है, इसलिए इन्हें टाइप 2 मधुमेह होने का खतरा अधिक होता है।
अध्ययन के प्रमुख लेखक ने कहा कि हम इस बहस को आलू के अच्छे या बुरे होने के सवाल से आगे ले जा रहे हैं और अब ज़्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इन्हें कैसे तैयार किया जाता है और हम इनकी जगह क्या खा सकते हैं।
बीएमजे द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि सप्ताह में तीन बार फ्रेंच फ्राइज़ खाने से टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा 20% बढ़ जाता है, लेकिन इसी प्रकार अन्य तरीकों से पकाए गए आलू – उबले हुए, बेक किए हुए या मसले हुए – खाने से खतरा इतना अधिक नहीं बढ़ता है।
इस अध्ययन में 2,00,000 से ज़्यादा लोगों पर किए गए 30 साल के आहार सर्वेक्षण का विश्लेषण किया गया। परिणामों के अनुसार, हफ़्ते में सिर्फ़ तीन बार फ्रेंच फ्राइज़ खाने से टाइप 2 मधुमेह का खतरा कई गुना बढ़ सकता है, जबकि साबुत अनाज वाले खाद्य पदार्थों से इसे बदलने से यह खतरा 19% तक कम हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उबले, मसले या बेक्ड आलू का मधुमेह पर कोई खास असर नहीं देखा गया है, लेकिन आलू का सेवन कम करने से कई स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं।














