पुछले कुछ समय में लखनऊ और दिल्ली में घटे हादसे डराने वाले हैं। यही नहीं, ये हादसे देश के शहरी बुनियादी ढांचे के हवाले से नागरिक सुरक्षा को भी लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 से 2024 के बीच देश भर में इमारत गिरने, आग लगने और गड्ढों या मैनहोल में गिरने की घटनाओं में लगभग 33 हजार लोगों की मौत हुई। इनमें से ज्यादातर मौतें शहरी इलाकों में हुईं, जो सिविक गवर्नेंस और सुरक्षा नियमों को लागू करने में गंभीर कमियों की ओर इशारा करती हैं।
खबर में NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की रिपोर्टों पर आधारित आंकड़ों का जायज़ा लेने पर पता चलता है कि हर साल हजारों लोगों की जान ऐसे हादसों में जाती है, जिन्हें बेहतर निगरानी, नियमित रखरखाव और सुरक्षा नियमों के प्रभावी पालन से काफी हद तक रोका जा सकता था।
वास्तविक संख्या के मामले में रिपोर्ट कहती है कि 33 हजार का आंकड़ा पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। नगर निगम की सीमा के भीतर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं, जिनमें कई मामलों में खराब सड़कें और गड्ढे भी भी शामिल हैं, इनमें कोई अलग से डेटा उपलब्ध नहीं है। इसी तरह दूषित पानी के कारण होने वाली मौतों का भी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वास्तविक संख्या काफी अधिक हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक़, खराब रखरखाव, असुरक्षित इमारतें, खुले या क्षतिग्रस्त मैनहोल और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसी समस्याएं केवल दुर्घटनाएं नहीं हैं, बल्कि शहरी प्रशासन की जवाबदेही से सीधे जुड़ी हैं।
खबर के हवाले से इस सेक्टर में काम कर चुके एक्सपर्ट्स और पूर्व अधिकारियों ने भी इस बात पर जोर दिया कि कंस्ट्रक्शन को आसान बनाने और डीरेगुलेशन (नियमों में ढील) के लिए सरकार की कोशिशों में संतुलन होना चाहिए।
खबर में एक अधिकारी के हवाले से यह मुद्दा ही सामने आया है कि अधिकारी यह फर्क नहीं समझ पा रहे हैं और डीरेगुलेशन के नाम पर रोजमर्रा के काम भी नहीं कर रहे हैं। इसका एक अहम बुरा असर ‘डी-स्किलिंग’ (कौशल का नुकसान) के तौर पर सामने आया है, क्योंकि अब वे फैसले लेने और काम करने में सक्षम नहीं रहे हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते हर साल हजारों लोग अपनी जान गंवाते हैं। साथ ही यह बात भी सामने आती है कि बुनियादी ढांचे में सुधार और सख्त नियमों के जरिए इन हादसों को रोका जा सकता है।