संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC) की एक नई शोध रिपोर्ट में मादक पदार्थों एवं अपराध नियंत्रण के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित अपराधों के बढ़ते प्रभाव, उसकी कार्यप्रणाली और अपराध नैटवर्क की ताक़त के तौर-तरीक़ों पर प्रकाश डाला गया है।
वर्ष 2000 से 2023 के बीच, हर साल संगठित अपराध से जुड़ी हत्याओं में औसतन 95 हज़ार लोगों की मौत हुई, जो दुनिया भर में सशस्त्र संघर्षों में होने वाली वार्षिक मौतों के लगभग बराबर है।
विश्व में हर 5 में से 1 जानबूझकर की गई हत्या संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़ी होती है. वहीं, अमेरिका महाद्वीप में इस तरह की हत्याएँ जानबूझकर की गई कुल हत्याओं का लगभग आधा हिस्सा हैं. हालांकि, संगठित अपराध से होने वाला नुक़सान केवल हिंसा तक सीमित नहीं है।
यूएनओ डीसी (UNODC) की इस शोध रिपोर्ट में, इन ख़तरों से निपटने के लिए अनेक उपाय सुझाए गए हैं, जिनमें जोखिम का विश्लेषण करना, विभिन्न क्षेत्रों के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना, अवैध वित्तीय लेनदेन को रोकना और संगठित अपराध से अर्जित सम्पत्तियों को जब्त करना या उसे वापिस हासिल करना शामिल है.
ड्रग्स के तस्करों द्वारा उपलब्ध कराए गए नशीले पदार्थों के कारण, हर वर्ष लाखों लोगों की समय से पहले मौत हो जाने की आशंका है और विकलांगता की वजह से उनके स्वस्थ जीवन के वर्षों को भी नुक़सान पहुँचता है।
इसके अलावा पत्रकारों, सामुदायिक नेताओं और मानवाधिकार रक्षकों की हत्याएँ नागरिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक भरोसे को कमज़ोर करती हैं, जबकि सरकारी संस्थानों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की वैधता, प्रभावशीलता और स्वतंत्रता भी प्रभावित होती है।
संगठित आपराधिक गिरोहों द्वारा अर्जित अरबों डॉलर उन्हें सरकारी संस्थानों पर बड़ा वित्तीय प्रभाव जमाने में सक्षम बनाते हैं, जिससे वे शासन व्यवस्था में घुसपैठ और अधिकारियों को भ्रष्ट करने में सफल होते हैं।
इसके अलावा, ये अवैध अर्थव्यवस्थाएँ, क़ानूनी अर्थव्यवस्था को विकृत करती हैं, निवेश और सतत विकास में बाधा डालती हैं और उन सार्वजनिक संसाधनों को भी प्रभावित करती हैं, जिन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में लगाया जा सकता था।
वहीं, रोजगार और छोटे-मोटे अपराधों पर नियंत्रण जैसी बुनियादी सेवाओं के बदले, समुदाय कई बार चुपचाप इन गिरोहों के नियंत्रण को स्वीकार कर लेते हैं, जिससे उनकी स्थानीय पकड़ और मज़बूत हो जाती है।
इनमें मादक पदार्थ, हथियार, प्रवासी, वन्यजीव, प्राकृतिक संसाधन, सांस्कृतिक धरोहर, नकली दवाइयाँ और ईंधन शामिल हैं. अवैध मादक पदार्थ व्यापार से हर वर्ष संगठित आपराधिक गिरोहों को सैकड़ों अरब डॉलर की कमाई होने का अनुमान है।
उदाहरण के तौर पर, 2019 से 2022 के बीच अफ़ीम और मेथमफ़ेटामिन तस्करी से जुड़े 3.4 अरब से 6.9 अरब डॉलर तक के अवैध वित्तीय लेनदेन, हर वर्ष बाल्कन मार्ग से (अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, तुर्कीये से होकर योरोपीय देशों) सीमा पार पहुँचे, जो इस मार्ग पर स्थित कुछ देशों के सकल घरेलू उत्पाद का बड़ा हिस्सा है।
मादक पदार्थ तस्करी अब भी अधिकांश अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों की आर्थिक रीढ़ बनी हुई है, लेकिन ये समूह मानव तस्करी, हथियार, वन्यजीव, ईंधन और नकली सामानों की तस्करी जैसे कई अन्य अवैध कारोबारों में भी फैल चुके हैं।
साथ ही, साइबर अपराध भी आय का एक बड़ा स्रोत बन गया है. पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया में ऑनलाइन ठगी से होने वाले वित्तीय नुक़सान का अनुमान केवल 2023 में 18 अरब से 37 अरब डॉलर के बीच लगाया गया।
नई सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों (ICT) ने आपराधिक गिरोहों के लिए, लोगों को निशाना बनाना और संस्थानों, कारोबारों व व्यक्तियों की टैक्नॉलॉजी पर बढ़ती निर्भरता का फ़ायदा उठाना आसान बना दिया है।
इसके परिणामस्वरूप, संगठित आपराधिक समूह अब ऑनलाइन जबरन वसूली, धोखाधड़ी और ठगी को औद्योगिक स्तर पर अंजाम दे रहे हैं. अब अपराधियों और पीड़ितों का एक ही जगह मौजूद होना ज़रूरी नहीं रह गया है, क्योंकि अपराधी सीमा पार से और एक साथ कई स्थानों से काम कर सकते हैं।
टैक्नॉलॉजी ने “पारम्परिक” अपराधों के दायरे, गति और प्रभाव को बढ़ाने के अलावा, ऐसे नए “साइबर-निर्भर” अपराधों को भी जन्म दिया है, जिन्हें केवल डिजिटल टैक्नॉलॉजी के माध्यम से ही अंजाम दिया जा सकता है, जैसे साइबर धोखाधड़ी, हैकिंग और मैलवेयर हमले।