ऐप्सटीन फ़ाइल्स पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने एक वक्तव्य जारी करते हुए आगाह किया है कि इन फ़ाइलों में दर्ज कथाकथित कृत्य और गतिविधियाँ, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अन्तर्गत कुछ गम्भीरतम अपराधों की श्रेणी में गिनी जा सकती हैं।

मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि इन फ़ाइलों में दर्ज किए गए रुझान, इस कसौटी को पूरा कर सकते हैं और इनके लिए राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय स्तर के तमाम सक्षम न्यायालयों में मुक़दमा चलाया जाना चाहिए।
ग़ौरतलब है कि इन फ़ाइलों के बारे में जानकारी, ऐप्सटीन फ़ाइल्स पारदर्शिता अधिनियम (Epstein Files Transparency Act) के बाद सामने आई है जो 19 नवम्बर 2025 को दस्तख़त किए जाने के बाद क़ानून बना।
मानवाधिकार विशेषज्ञों के अनुसार, इन फ़ाइलों में नज़र आने वाले व्यवहार को यौन दासता, प्रजनन हिंसा, जबरन गुमशुदगी, उत्पीड़न, अमानवीय और असम्मानजनक व्यवहार, और भ्रण हत्या परिभाषित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा है, “महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध इन अत्याचारों का स्तर, प्रकृति, चरित्र और देशों की सीमाओं से परे तक दायरा इतना विशाल है कि उनमें से कुछ तो, मानवता के विरुद्ध अपराधों की श्रेणी में भी शामिल हो सकते हैं।”
अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अन्तर्गत, मानवता के विरुद्ध अपराध तब घटित होते हैं जब किसी आबादी के विरुद्ध व्यापक पैमाने या व्यवस्थागत रूप में, बलात्कार, यौन दासता, जबरन वेश्यावृत्ति, तस्करी, दमन, प्रताड़ना या हत्याओं को अंजाम दिया जाता है। इसमें हमले की जानकारी होना भी शामिल होता है।
संयुक्त राज्य अमरीका के न्याय मंत्रालय ने कुछ देरी के बाद 30 जनवरी 2026 को, इस सम्बन्ध में भारी मात्रा में सामग्री जारी की जिसमें 30 लाख से अधिक पन्ने, 2,000 वीडियो और 1 लाख 80 हज़ार तस्वीरें शामिल हैं।
क्या है यह मामला
अगस्त 2019 में न्यूयॉर्क की एक जेल में 66 वर्ष की आयु में, आत्महत्या के बाद, जैफ़री ऐप्सटीन का निधन हो गया था. जैफ़री ऐप्सटीन का मिलना-जुलना राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर के राजनेताओं, मशहूर और कारोबारी हस्तियों के साथ था।
उस पर संयुक्त राज्य अमरीका में इस तरह के आपराधिक आरोप लगे थे कि उसने एक ऐसी व्यवस्था चलाई जिसमें युवतियों को शोषण के लिए भर्ती किया जाता था, और उनमें से बहुत सी लड़कियाँ तो नाबालिग़ और नाज़ुक हालात वाली थीं।
जैफ़री ऐप्सटीन के सहयोगी गिज़लैन मैक्सवैल को 2021 में यौन तस्करी व अन्य अपराधों में, दोषी पाया गया था और उसे 2022 में 20 वर्ष के कारावस की सज़ा हुई थी।
अलबत्ता इन आपराधिक गतिविधियों में, कुछ अन्य व्यक्तियों के शामिल होने, वित्तीय ढाँचे और इनका दायरा देशों की सीमाओं से भी परे तक फैले होने के बारे में अब भी प्रश्न बने हुए हैं।
स्वतंत्र, व्यापक और निष्पक्ष जाँच
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इस मामले में जवाबदेही निर्धारित किए जाने की माँग करने में भुक्तभोगियों के साहस और लगन की सराहना की है। उन्होंने ज़ोर देकर कह है कि अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून के तहत देशों की ये ज़िम्मेदारी है कि वो महिलाओं व लड़कियों के विरुद्ध हिंसा को होने से रोकें, हिंसा हो जाने पर उसकी जाँच करें और दोषियों को दंडित करें।
