मेवे में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, फिर भी इन्हें नियमित रूप से खाने से वजन बढ़ाए बिना शरीर की चर्बी कम करने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
डाइट में मेवे शामिल करने से शरीर की बनावट और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में कुछ हद तक सुधार हो सकता है। यह जानकारी एक नई व्यवस्थित समीक्षा के माध्यम से सामने आई है। हालाँकि, इसके फायदे नट्स के प्रकार और खान-पान की कुल आदतों के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।
‘फूड्स’ (Foods) जर्नल में प्रकाशित इस व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में यह जांच की गई कि अलग-अलग तरह के स्वस्थ फैट (healthy fats) वाले नट्स, शरीर के वजन, फैट मास, मसल मास और ब्लड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कैसे प्रभावित करते हैं।
शोधकर्ताओं ने 119 रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स (RCTs) से जुड़े 154 लेखों की समीक्षा की, जिनमें से 102 ट्रायल्स को मात्रात्मक मेटा-विश्लेषण (quantitative meta-analysis) में शामिल किया गया।
इस विश्लेषण में मुख्य रूप से उन मेवों पर ध्यान दिया गया, जिनमें मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (MUFA) और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (PUFA) भरपूर मात्रा में होते हैं। इन दोनों को ही स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद फैट माना जाता है।
नतीजों से पता चला कि नट्स खाने से शरीर के वजन, बॉडी मास इंडेक्स (BMI) या कमर के घेरे में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, भले ही इनके सेवन से रोजाना लगभग 120 अतिरिक्त कैलोरी शरीर में जा रही थी।
महत्वपूर्ण बात यह है कि नियमित रूप से नट्स खाने से शरीर की कुल चर्बी में लगभग 0.41 किलोग्राम की कमी आई और शरीर में फैट का प्रतिशत 0.3 प्रतिशत-अंक (percentage-point) तक कम हो गया।
प्रतिभागियों के ‘लीन बॉडी मास’ (lean body mass) के अनुपात में भी 0.71 प्रतिशत-अंक की वृद्धि देखी गई। हालाँकि, ‘एब्सोल्यूट लीन मास’ (absolute lean mass) में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, जिसका मतलब है कि इससे वास्तव में मांसपेशियों (muscles) में कोई वृद्धि नहीं हुई।
दिलचस्प बात यह है कि MUFA से भरपूर मेवे खाने से फैट मास में लगभग 0.42 किलोग्राम की कमी देखी गई, हालाँकि शोधकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि ये PUFA वाले नट्स की तुलना में अधिक प्रभावी हैं।
इस विश्लेषण में कुल कोलेस्ट्रॉल, LDL कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स में भी कुछ कमी देखी गई, जबकि HDL कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। हालाँकि, शोधकर्ताओं ने अलग-अलग अध्ययनों के बीच के अंतर और कुछ परिणामों को लेकर अनिश्चितता की ओर भी इशारा किया है।
हालाँकि वैज्ञानिकों का मानना है कि, यह जानने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है कि क्या ये सुधार लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए वास्तव में फायदेमंद साबित होते हैं।