ड्राइवरों की हड़ताल ने प्रभावित किया आम जन-जीवन

देशभर के ड्राइवर हिट एंड रन को लेकर लाए गए नए कानून का विरोध कर रहे हैं। ट्रांसपोर्ट की हड़ताल से आम जन-जीवन प्रभावित हो रहा है। हड़ताल अगर लंबी खींचने पर हालात और भी खराब हो सकते हैं।

ड्राइवरों की हड़ताल ने प्रभावित किया आम जन-जीवन

नए कानून को लेकर उत्तर भारत के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। ट्रक, ट्रेलर, बस, लोकपरिवहन और टैक्सी ड्राइवर ने अपनी बात कहने के लिए हड़ताल से लेकर सड़क जाम तक का तरीका अपनाया है।

भारतीय न्याय संहिता में हिट एंड रन कानून के नए प्रावधान के तहत अगर गाड़ी ड्राइवर हादसे के बाद पुलिस को सूचना दिए बिना फरार होता है तो उसे 10 साल की सजा होगी। इसके साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।

इस अव्यवस्था के चलते देश के कई राज्यों में खाने और दूध की किल्लत हो रही है। साथ ही देश के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर लोगों की लंबी कतारें नज़र आ रही हैं।

हिट एंड रन से तात्पर्य है कि दुर्घटना के बाद ड्राइवर का गाड़ी के साथ मौके से फरार हो जाना। यदि किसी गाड़ी से किसी को टक्कर लग जाने पर चालाक, घायल व्यक्ति की मदद करने के बजाय गाड़ी लेकर फरार हो जाता है तो इस केस को हिट एंड रन में रखा जाता हैं।

हिट एंड रन मामले में पिछले कानून के तहत ड्राइवर को जमानत मिल जाती थी और अधिकतम दो साल की सजा का प्रावधान था। कई बार देखने में आया है कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसकी जान बच जाती है। इन मामलों में सख्ती का प्रावधान किया गया है।

अब देशभर के ट्रक, ट्रेलर, बस, लोकपरिवहन और टैक्सी ड्राइवर इस कड़े प्राविधान के विरोध में आ गए हैं। इसका सबसे ज़्यादा असर उत्तर भारत के कई राज्यों में देखने को मिल रहा है। यहाँ हड़ताल के साथ हाइवे जाम के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है।

आंकड़ों के मुताबिक़ दुर्घटना के चलते हिट एंड रन केस में हर साल देश में 50 हजार लोगों की मौत हो जाती है। मौतों के इन आंकड़ों को देखते हुए नए कानूनों के तहत ड्राइवरों पर सख्ती का प्रावधान किया गया है।

इस नए कानून का विरोध कर रहे ड्राइवरों का कहना है कि अगर दुर्घटना के बाद फरार होने पर पकडे जाने की दशा में उन्हें 10 साल की सजा होगी जबकि मौके पर रुकने पर भीड़ उन पर हमला करके मार देगी।

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