क्या खाने की चाहत मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है?

बात जब खाने की तलब की आती है, तो अकसर कई लोग बेकाबू से नज़र आने लगते हैं, इसके नतीजे में यह लोग अपने उसूलों को बरक़रार नहीं रख पाते और पसंदीदा फ़ूड के आगे मजबूर हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाने की तलब आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है?

क्या खाने की चाहत मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है?इस विषय पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भरपेट और स्वादिष्ट भोजन की चाहत खुशी के हार्मोन ‘डोपामाइन’ से संबंधित है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जब हम मीठा, नमकीन, वसायुक्त भोजन खाते हैं, तो यह प्रक्रिया डोपामाइन के स्राव को ट्रिगर करती है, जो एक सुखद एहसास पैदा करती है, जो खाने की इच्छा को प्रबल करती है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन की ख्वाहिश किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बहुत कुछ बता सकती है।


इस संबंध में जानकारों का कहना है कि समय के साथ खाने की इच्छा को मजबूत बनाया जा सकता है। वह कहते हैं कि डोपामाइन की वृद्धि आपको खाद्य पदार्थों की तलाश करने के लिए प्रेरित करती है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मस्तिष्क के डोपामाइन सिस्टम के कारण, स्वादिष्ट भोजन की लालसा भोजन की दृष्टि या छवि या भोजन की गंध से उत्पन्न हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार मानसिक तनाव या चिंता की स्थिति में डोपामाइन कम होने पर भोजन की लालसा कम हो जाती है। वहीँ दूसरी तरफ स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, कभी-कभी खाने की इच्छा होना इस बात का संकेत है कि व्यक्ति मानसिक रूप से ठीक हो रहा है।

यह लालसा केवल एक व्यक्ति तक ही सीमित नहीं रहती। अकसर मामलों में कुछ लोग तो खाने की इस ख्वाहिश को अपनी गर्भवती साथी के साथ साझा करने की बात भी स्वीकारते हैं।

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