हाइपरटेंशन को उच्च रक्तचाप के नाम से भी जाना जाता है। यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है और आज के समय में सबसे तेजी से बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इन समस्याओं पर काबू रखने के लिए सीसीआरएएस ने गाइडलाइंस भी दी हैं।

समय रहते इस बीमारी का इलाज कराना बेहद जरूरी है और इसके लिए ज़रूरी है कि इसके लक्षणों को पहचाना जाए। यह एक ऐसी स्थिति है जो अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी विकसित हो सकती है। इस बीमारी में धमनियों में रक्त का दबाव लगातार बढ़ा रहता है और यही कारण है कि इसे “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है।
वैसे तो हाई और लो बीपी कई अलग मानकों पर आधारित होता है मगर सेंटर काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंस (सीसीआरएएस) के अनुसार, ब्लड प्रेशर को हाई तब कहा जाता है जब सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 140 एमएम एचजी या उससे ज़्यादा हो, या डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 90 एमएम एचजी या उससे ज़्यादा हो।
सीसीआरएएस ने हाई ब्लड प्रेशर से बचने के लिए गाइडलाइंस भी दी हैं। उम्र बढ़ने के साथ धमनियां भी स्वाभाविक रूप से थोड़ी कम लचीली हो जाती हैं और रक्तचाप बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। यह आज के समय में सबसे तेजी से बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है।
सिरदर्द, तनाव या घबराहट, छाती में दर्द, पसीना आना, नाक से खून आना, चक्कर आना, असामान्य हार्ट रिदम, सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अगर हाई ब्लड प्रेशर का उचित इलाज नहीं किया जाए तो यह हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी डैमेज और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।
बीपी के बारे में जागरूकता फैलाने के उदेश्य से नेशनल हेल्थ मिशन ने इसकी जानकारी देते हुए कहा है कि उपरोक्त समस्या होने पर आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जब ऐसे लक्षण दिखते हैं, तो इसका मतलब रक्तचाप का बढ़ना हो सकता है और यह आपके अंगों पर बुरा असर डाल रहा है।
जानकारी में खासकर 30 साल की उम्र के बाद नियमित तौर पर उच्च रक्तचाप के लिए अपनी जांच कराते रहने की बात भी कही गई है। दरअसल उम्र बढ़ने के साथ धमनियां भी स्वाभाविक रूप से थोड़ी कम लचीली हो जाती हैं और रक्तचाप बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।
सीसीआरएएस (Central Council for Research in Ayurvedic Sciences) का कहना है कि हाइपरटेंशन का एक बड़ा कारण लाइफस्टाइल से जुड़ा है। अधिक तनाव लेना, शराब, तंबाकू, चाय, कॉफी का अत्यधिक सेवन करना, रात में जागने की आदत और दिन में सोना आदि ऐसी चीजें हमारी खराब जीवनशैली का हिस्सा हैं। यह सब उच्च रक्तचाप को बढ़ावा देता है। इसके अलावा बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल डाइट, मोटापा, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स और अनुवांशिकी भी हाइपरटेंशन के होने का बड़ा कारण है।
सीसीआरएएस ने हाई ब्लड प्रेशर से बचने के लिए गाइडलाइंस भी दी हैं। जिसके तहत खानपान में सुधार के अलावा कम सोडियम वाली डाइट लें। कम वसा युक्त भोजन के साथ फल और सब्जियां नियमित रूप से खाएं। नारियल और छाछ भी लेते रहें।
नियमित ध्यान, प्राणायाम, योगासन, शवासन और हल्की शारीरिक गतिविधियां अपनाएं, सदैव सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें, यदि मोटापा है, तो वजन घटाने पर विशेष ध्यान दें और अपनी जीवन शैली व्यवस्थित करें।













