सात सौ प्रतिशत किराया वृद्धि वाली याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा- फ्लाइट से यात्रा मत करिए

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के बाद कहा, ‘हवाई यात्रा न करें’। अदालत ने यह बात कहने के साथ हवाई किराए में 700 प्रतिशत की बढ़ोतरी का आरोप लगाने वाली याचिका को तुरंत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार किया।

सोमवार (2 नवंबर, 2026) को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता से कहा कि वह हवाई यात्रा न करे। कोर्ट ने उस याचिका को तुरंत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया, जिसमें हवाई किराए में लगभग 700% की बढ़ोतरी का आरोप लगाया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार का कहना है कि ‘भारतीय वायुयान अधिनियम’ के तहत विमानन नियमों को तेजी से लागू किया जा रहा है, ताकि अस्थिरता को रोका जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

द हिन्दू की एक खबर के मुताबिक़, एक वकील ने जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की बेंच के सामने इस मामले को तुरंत सुनवाई के लिए रखने का अनुरोध किया। वकील ने कहा, ‘हवाई किराए में 700% की बढ़ोतरी हुई है।’

वकील ने आगे कहा कि हवाई यात्रा एक आवश्यक सेवा है। “यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।” संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता से संबंधित है।

खबर के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट पहले से ही सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायण की एक अलग याचिका पर सुनवाई कर रहा है। उन्होंने एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक (रेगुलेटर) की मांग की है, जो नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। साथ ही, उन्होंने भारत में निजी एयरलाइनों द्वारा हवाई किराए और अन्य शुल्कों में होने वाले “अनिश्चित उतार-चढ़ाव” को नियंत्रित करने के लिए नियामक दिशानिर्देशों की भी मांग की है।

16 अक्टूबर को इस याचिका पर सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत के विमानन क्षेत्र को विनियमित करने के लिए 2024 के कानून के तहत नियमों को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है, और उम्मीद है कि इन्हें दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित कर दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा है कि वे ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ के तहत प्रकाशित नियमों को अगली सुनवाई की तारीख—16 नवंबर—को कोर्ट के सामने पेश करें।

17 अगस्त को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसने ‘भारतीय वायुयान अधिनियम’ के तहत नियम बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाई है, जिसका उद्देश्य भारत के विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाना है।

पिछले साल नवंबर में, सुप्रीम कोर्ट ने श्री लक्ष्मीनारायण की याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा था। जनवरी में इस मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह हवाई किराए में होने वाले “अनिश्चित उतार-चढ़ाव” में दखल देगा। साथ ही, कोर्ट ने त्योहारों के समय किराए में होने वाली भारी बढ़ोतरी की ओर भी ध्यान दिलाया।

कोर्ट ने एयरलाइनों द्वारा किराए में की गई भारी बढ़ोतरी को “शोषण” करार दिया और केंद्र सरकार तथा नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से इस याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

बताते चलें कि सोमवार को केंद्र सरकार ने भारतीय वायुयान नियम, 2026 का गजट जारी किया है। अब एयरलाइंस को किराया बढ़ाने या घटाने के लिए सरकार से अनुमति नहीं लेनी होगी यानी नए नियमों के तहत विमानन कंपनियों को हवाई टिकटों का किराया तय करने की छूट दी गई है।

खबर में यह भी कहा गया है कि किसी अपरिहार्य स्थिति में सरकार एयरलाइन कंपनियों को किराए को लेकर निर्देश दे सकती है। ये नए नियम पहली जनवरी 2027 से लागू होंगे।

जानकारी के मुताबिक़, भारत में प्रत्येक वर्ष करीब 24 करोड़ हवाई यात्राएं होती हैं। नागर विमानन मंत्रालय और DGCA के 2024-25 के आंकड़ों बताते हैं कि इनमें 16.55 करोड़ घरेलू और 7.39 करोड़ अंतरराष्ट्रीय यात्री यात्राएं शामिल हैं।

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