लंबे समय से बीमार चल रहे धर्मेंद्र ने 89 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा

ही मैन के नाम से लोकप्रिय धर्मेंद्र की मौत के साथ ही हिंदी सिनेमा के एक युग का हुआ अंत हो गया है। 89 साल के दिवंगत अभिनेता लम्बे समय से बीमार थे। लंबे समय से बीमार चल रहे अभिनेता धर्मेंद्र आज पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। बड़ी संख्या में सेलेब्स बॉलीवुड के हीमैन के अंतिम दर्शन करने के लिए उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए। 

लंबे समय से बीमार चल रहे धर्मेंद्र ने 89 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा

बीते कुछ दिनों से धर्मेंद्र डॉक्टर्स की लगातार निगरानी में बने हुए थे। पिछले दिनों धर्मेंद्र को सांस लेने में दिक्कत के चलते हुए वेंटिलेटर पर भी शिफ्ट किया गया था मगर डाक्टरों की कोशिशों के बाद उन्हें एक बार जीवन मिला मगर इस बार उन्हें नहीं बचाया जा सका। उनकी बीमारी की खबर मिलते ही कई बड़े सितारे उनके घर पहुंचे।

धर्मेंद्र का पूरा नाम धरम सिंह देओल था। अकसर इन्हें धरम पा जी के नाम से भी सम्बोधित किया जाता था। 8 दिसम्बर 1935 को पंजाब में जन्में धर्मेंद्र के पिता स्कूल में हेडमास्टर थे। बचपन में ही अपने गांव से मीलों दूर जब धर्मेंद्र ने एक बार सिनेमाघर में सुरैया की फिल्म ‘दिल्लगी’ को देखा। इसके बाद उनपर एक्टिंग का जुनून सवार हो गया था। धर्मेंद्र दीवानगी की हद तक दिलीप कुमार के भी फैन थे उनकी बेपनाह इज़्ज़त करते थे।

बताते हैं कि धर्मेंद्र ने लगातार 40 दिनों तक ‘दिल्लगी’ फिल्म देखी और इसे देखने के‍ लिए वह पैदल चलते हुए एक लम्बी यात्रा करते थे। इसी ज़माने में उन्हें पता चला कि धर्मेंद्र फिर जानकारी मिली कि फिल्मफेयर पत्रिका नई प्रतिभा की खोज कर रही है, उन्होंने भी अपना फॉर्म डाल दिया और टैलेंट हंट में चुनकर मुंबई आ गए। इस तरह फ़िल्मी दुनिया को एक ऐसा सितारा मिला जो सदा के लिए अपनी अदाकारी और चमक छोड़ गया है।

धर्मेंद्र ने अपना फ़िल्मी सफर 1960 में आई अर्जुन हिंगोरानी की फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से शुरू किया था। धर्मेंद्र ने एक्शन से लेकर कॉमेडी तक हर तरह की भूमिका निभाई। करीब 300 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले धर्मेंद्र ने हर किरदार से लोगों के दिलों में जगह बनाई। उन्हें लोग उनके अभिनय के साथ बेहद अच्छी उर्दू के कारण भी हमेशा याद रखेंगे।

1970 के दशक में धर्मेंद्र ‘एक्शन हीरो’ के रूप में लोकप्रिय हुए। लोगों ने उन्हें ही मैन का ख़िताब दिया। साल 1975 में रिलीज ‘शोले’ धर्मेंद्र के लिए रील और रियल दोनों लाइफ में लकी साबित हुई। वीरू के किरदार में उन्होंने दशकों तक अपना जलवा बरकरार रखा और फिल्म की डायलॉग बच्चे बच्चे की जुबां पर आ गए। आखिर इस फिल्म से ही उन्हें उनकी बंसती भी मिल गई थी।

यही वीरू साल 1972 में रिलीज हुई ‘सीता और गीता’, में अपना सिक्का जमा चुके थे। ये फिल्म न सिर्फ हिट हुई, बल्कि धर्मेंद्र को ‘डबल रोल किंग’ भी साबित कर दिया।

कॉमेडी फिल्मों की बात करें तो उनकी ‘चुपके चुपके’ (1975) लोगों को खूब पसंद आई। इसके अलावा ‘राम बलराम’ (1976) जैसी फिल्मों से वे आम आदमी के करीब हुए।

89 साल की उम्र में भई वह फिल्मी दुनिया में सक्रिय रहे हैं। अभी उनकी फिल्में रिलीज होनी बाकी है। धर्मेंद्र की आने वाली फिल्मों में ‘इक्कीस’ (Ikkiis), ‘अपने 2’ और ‘हाउसफुल 5’ शामिल हैं। ‘इक्कीस’ एक वॉर ड्रामा है, ‘अपने 2’ ‘अपने’ का सीक्वल है, और ‘हाउसफुल 5’ भी एक आने वाली मल्टी-स्टारर कॉमेडी फिल्म है।

धर्मेंद्र को 2012 में पद्म भूषण पुरस्कार से नवाजा गया। इसके अलावा उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया जा चुका है।

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