नागपुर की 17 वर्षीय दृष्टिबाधित तैराक ईश्वरी पांडे ने तैराकी की मिसाल कायम करते हुए इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। ईश्वरी ने पाक स्ट्रैट (Palk Strait) को तैरकर पार किया और वह दुनिया की पहली ऐसी दृष्टिबाधित तैराक बन गई हैं जिन्होंने यह कारनामा सफलतापूर्वक कर दिखाया है।
श्रीलंका के तलाईमन्नार से अपनी तैराकी शुरू करने वाली ईश्वरी पांडे ने भारत के धनुषकोडी (तमिलनाडु) तक का सफर किया। ईश्वरी पांडे जन्म से ही दृष्टिबाधित हैं। श्रीलंका के तलाईमन्नार से भारत के धनुषकोडी (तमिलनाडु) तक की यह यात्रा 38 किलोमीटर की है। इसे पूरा करने में उन्होंने 11 घंटे 15 मिनट का समय लिया।
ईश्वरी की यह यात्रा 6 अप्रैल को सुबह करीब 4:00 बजे उरमालाई पॉइंट में प्रवेश से प्रारम्भ हुई थी 7 अप्रैल की दोपहर 3:15 बजे धनुषकोडी स्थित अरिचलमुनाई पर संपन्न हुई।
अपने इस सफर में उन्होंने कई प्रकार की चुनौतियों का सामना किया। ईश्वरी पांडे के कोच संजय बटवे ने अपनी शिष्या के इस विश्व रिकॉर्ड पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि ईश्वरी का यह कारनामा सचमुच तारीफ के काबिल है।
अपने इस मक़सद को पूरा करने के लिए ईश्वरीय को शारीरिक चुनौती के साथ प्राकृतिक बाधाओं का भी सामना करना पड़ा। इस यात्रा में उन्हें समुद्र की तेज धारा के साथ बदलते ज्वार-भाटा, बारिश और तेज हवाओं का सामना करना पड़ा। इस दौरान समुद्री जीवों जिनमें जेलीफिश और शार्क का भी उन्हें सामना करना पड़ा।
ईश्वरी के इस मिशन में नागपुर के अनुभवी तैराकों की एक टीम लगातार उनके साथ रही। तमिलनाडु जिला तैराकी संघ के जयकुमार और अंतरराष्ट्रीय ओपन-वॉटर तैराक सुखदेव धुर्वे भी इस अभियान के दौरान उपस्थित थे। गति बनाए रखने वाले तैराक जिन्हे ‘पेस स्विमर’ कहते हैं ने इस मिशन में ईश्वरी का साथ दिया। इस टीम में ईशान पांडे, रविंद्र तरारे, भावी राजगिरे, संदीप वैद्य, शंकर अष्टनकर, विलास फाले और डॉक्टर नीरव पांड्या और डॉ. अभय राजगिरे शामिल थे। राष्ट्रीय कोच विजयकुमार भी पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहे।
ईश्वरी की इस असाधारण कामयाबी में उनके माता-पिता कमलेश और अरुणा पांडे की मेहनतें के साथ विश्वास भरा समर्थन रहा है। वह पहले भी कई तैराकी प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा साबित कर चुकी हैं।