नोट छापने वाले थके तो सेना के 200 जवान ड्यूटी पर लगाए गए

मैसूर। नोटबंदी से पहले देश के पांच में से दो या तीन प्रिंटिंग प्रेस में एक साथ नोट छपाई का काम होता था। लेकिन इस वक्त कैश का संकट कम करने के लिए पांचों प्रिंटिंग प्रेस में दो से तीन शिफ्ट में 24 घंटे काम हो रहा है। मैसूर की प्रेस में 24 घंटे 500 और 2,000 रुपए के नए नोट छापे जा रहे हैं। स्टाफ को थकान से बचाने के लिए सेना के 200 जवानों की मदद ली जा रही है। demonetization

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 – जवान पेपर को मशीन तक पहुंचाने, उसे मशीन में लोड करने, पैकेजिंग, लोडिंग और अनलोडिंग जैसे तमाम काम कर रहे हैं।

– सेना के जवान छपी हुई करंसी के डिस्ट्रिब्यूशन के दौरान सिक्युरिटी भी देख रहे हैं।
– पश्चिम बंगाल के सल्बोनी की प्रिटिंग प्रेस में भी 3 शिफ्ट में रोजाना 24 घंटे काम हो रहा है।

– यहां दोगुना प्रोडक्शन हो रहा है।

– नासिक में छोटे नोटों को छापने के लिए मध्य प्रदेश के देवास से नॉर्मल से अलग इंक मंगाई गई है।

– नोट छापने के लिए स्याही की कमी न पड़े, इसलिए देवास में स्याही बनाने का काम तीन शिफ्ट में 24 घंटे हो रहा है।

– यहां की करंसी नोट प्रेस में 500 के नोट छप रहे हैं।

– दिनभर में 70 लाख नोट छापे जा रहे हैं। करीब 1600 लोग दो शिफ्ट में 23 से 24 घंटे काम कर रहे हैं।

– 500 के अलावा 100, 50, 20 और 10 के नोट भी छप रहे हैं।

– कागज होशंगाबाद से और स्याही देवास से आ रही है।
– नोटबंदी से दो महीने पहले ही 500 और 1000 के नोटों की छपाई पर रोक लगा दी गई थी।

– देवास में सिक्युरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की यूनिट बीएनपी की सभी मशीनों पर 500 के नोट छप रहे हैं।
– इम्प्लॉई तीन शिफ्ट में 8-8 घंटे काम कर रहे हैं।

– प्रोडक्शन बढ़ाने के लए रिटायर्ड इम्प्लॉइज की भी मदद ली जा रही है।
– इन्हें 15 हजार रुपए तक वेतन दिया जाएगा।
– बीएनपी से रोजाना औसतन दो कंटेनर नोट रिजर्व बैंक को भेजा जा रहा है। इनमें 2 करोड़ तक पीस होते हैं।

– फिलहाल, बीएनपी में 20, 50, 100 की छपाई नाममात्र रह गई है।
– बीएनपी में लगी मशीनों पर नोटों की छपाई अलग-अलग स्तर पर होती है।

– पहले कलर आता है फिर डिजाइन और नंबर आते हैं।

– आखिर में कटिंग मशीन के बाद ऑटोमैटिक पैकिंग होती है और बंडल बन जाता है।

– होशंगाबाद में सिक्युरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड में लगी पीएम-5 मशीन से 24 घंटे 500 के नोट का कागज तैयार हो रहा है।

– मशीन से अब तक करीब 100 मीट्रिक टन कागज बन गया है।

– अनुमान के मुताबिक, एक मीट्रिक टन कागज से 500 के करीब 3 लाख नोट (15 करोड़ रुपए) बनते हैं।
– अभी प्रतिदिन 10 मीट्रिक टन कागज बन रहा है।

– इनसे 500 के करीब 30 लाख नोट बनेंगे, जो 150 करोड़ के होंगे।

– नोट बनाने के लिए तीन शिफ्टों में 24 घंटे काम चल रहा है।
– एसपीएम के करीब एक हजार कर्मचारी दिन-रात काम कर रहे हैं।

– होशंगाबाद में तैयार हुआ नोट का कागज 10 दिन बाद ही रिजर्व बैंक में छपकर पहुंच जाता है।
– पूरे देश की नजर एसपीएम पर टिकी है। यहां करीब 1 हजार इम्प्लॉई काम करते हैं।

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