धुंध और प्रदूषण से बेहाल हुई दिल्ली

नवम्बर के शुरूआती दिनों में दिल्ली-एनसीआर में छाई धुंध अच्छे संकेत नहीं दे रही है। इस समय दिल्ली बीते पांच सालों में सबसे प्रदूषित शहर बन चुका है। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर तक पहुँच चुका है।

धुंध और प्रदूषण से बेहाल हुई दिल्ली

बीते दिन दिल्ली में हवा की क्वालिटी बेहद खराब श्रेणी दर्शा रही थी। दिल्ली के साथ नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हालत ऐसे ही दिखे। यहाँ ग्रैप-3 लागू होने के साथ हर प्रकार के गैर-आवश्यक निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर रोक लग गई है।

यहाँ राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को छोड़ कर सभी तरह की निर्माण गतिविधियां बंद कर दी गई हैं। वायु गुणवत्ता पैनल ने दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के तीसरे चरण के तहत पाबंदिया लागू करने का निर्देश दिया है। जिसके तहत गैर-जरूरी निर्माण और तोड़-फोड़ के काम पर रोक लगाई गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार, शुक्रवार सुबह आठ बजे तक दिल्ली के मुंडका इलाके का औसत एक्यूआई 500 के साथ ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया।

दिल्ली के अलावा आस पास के शहरों में भी स्थिति काफी ख़राब है। आईजीआई एयरपोर्ट पर एक्यूआई 500, आईटीओ में 451, नजफगढ़ में 472 जबकि नरेला में 500 दर्ज किया गया।

हालात को देखते हुए दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में पेट्रोल से चलने वाले बीएस-3 इंजन और डीजल से चलने वाले बीएस-4 चार पहिया वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।

इसके साथ ही दिल्ली के तीन सौ किलोमीटर के भीतर प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रियल यूनिट तथा थर्मल पावर प्लांट पर निगाह रखी जाएगी साथ ही ज़रूरत पड़ने पर कार्रवाई भी की जा सकती है। होटल व रेस्तरां के तंदूर में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर भी पूरी तरह से रोक लग गई है।

प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सड़कों की झाड़ू का काम रोकते हुए नियमित तौर पर पानी का छिड़काव का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही राज्य सरकारों को पांचवी तक की कक्षाएं आनलाइन पढ़ाई जाने की भी सलाह दी गई है।

पत्थरों की कटाई जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ
हॉट मिक्स प्लांट व ईंट के भट्ठे चलाने पर रोक लगी रहेगी।

दिल्ली में प्रदूषण के चलते ग्रैप-3 लागू होने के बाद दिल्ली मेट्रो ने अपने फेरे बढ़ा दिये हैं। डीएमआरसी ने बताया है कि पूरे नेटवर्क में 20 फेरे बढ़ाए गये हैं।

बढ़ते प्रदूषण के चलते नोएडा पुलिस ने 10 साल पुराने डीजल वाहनों और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर कार्रवाई की बात कही है। विशेष अभियान के तहत बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट वाले वाहनों पर भी कार्रवाई की जा रही है।

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