अब राज्यसभा में पास होना है दिल्ली सेवा बिल, विपक्षी एकता की कड़ी परीक्षा

लोकसभा में दिल्ली सेवा बिल पास हो गया है और अब इसे राज्यसभा में पास होना है। इस मुद्दे पर टीडीपी और बीजेडी ने केंद्र को समर्थन देने का ऐलान किया है जिससे आम आदमी पार्टी की सियासी राह कठिन होती नज़र आ रही है।

अब राज्यसभा में पास होना है दिल्ली सेवा बिल, विपक्षी एकता की कड़ी परीक्षा

दिल्ली सेवा बिल विपक्षी एकता के लिए कठिन परीक्षा बना हुआ है। अब यह बिल राज्यसभा में यह बिल पेश होगा।

दिल्ली सर्विस बिल के मुद्दे पर विपक्षी गंठबंधन इंडिया के मौजूदा 26 दलों में से कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, सीपीआई, सीपीआई (एम), शिवसेना (उद्धव), जेडीयू, आरजेडी, जेएमएम, एनसीपी, एसपी, टीआरएस और बीआरएस सहित अधिकतर दलों ने पर AAP का समर्थन करने का फैसला किया है. इन दलों को राज्यसभा में करीब 105 सांसदों का समर्थन मिलने की उम्मीद है।

केंद्र को मज़बूती देने के लिए सरकार ने दिल्ली में नौकरशाही पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए मई में घोषित अध्यादेश में बदलाव करने की गरज़ से दिल्ली सेवा विधेयक पेश किया था। उस समय दो प्रभावशाली क्षेत्रीय पार्टियों- वाईएसआर कांग्रेस और बीजेडी ने इस बिल पर अपना समर्थन दिया था।

राज्यसभा में इन दोनों ही पार्टियों के कुल मिलाकर 18 वोट हैं। ऐसे में संसद में इसका पारित होना तय पहले से ही तय है।

भाजपा के बहुमत के आधार पर लोकसभा में दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक 2023 का पारित होना तय ही था, लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी के पास बहुमत नहीं होने के कारण इसका राज्यसभा में पारित होना एक चुनौती बन गया था।

ऐसे में भाजपा ने बीजेडी और वाईएसआरसीपी सहित बीएसपी तथा टीडीपी जैसे विपक्षी गठबंधन से बाहर रहने वाले दलों से आस बांध राखी थी।

ओडिशा तथा आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी पार्टियों के खुले समर्थन के चलते 237 की प्रभावी संख्या वाले ऊपरी सदन में बिल का समर्थन करने वाले सांसदों की संख्या 130 से अधिक हो गई है।

हाल ही में होने वाले राज्यसभा की 11 सीटों के चुनाव में भाजपा के 5 तथा तृणमूल के 6 सांसद निर्विरोध चुने गए। यहाँ कांग्रेस एक सीट के नुकसान में रही। राज्यसभा में उसके सांसदों की संख्या 30 रह गई जबकि भाजपा की संख्या 93 तक पहुंच गई।

245 सदस्यीय राज्यसभा में 24 जुलाई के बाद 7 सीटें रिक्त हो गईं। इनमें 4 सीटें जम्मू-कश्मीर से, दो मनोनीत जबकि उत्तर प्रदेश में एक सीट रिक्त हुई।

राज्यसभा में बहुमत का आंकड़ा 120 है जबकि भाजपा के पास पहले के 130 सांसदों का समर्थन मिला हुआ है।

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