दलित ईसाइयों ने की SC का दर्जा देने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने दलित ईसाइयों के लिए अनुसूचित जाति का दर्जा मांगने वाली राष्ट्रीय दलित ईसाइयों की याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता का कहना है कि धर्म परिवर्तन के बाद निचली जातियों के खिलाफ सामाजिक भेदभाव समाप्त नहीं होता है। उन्होंने कहा कि उनको आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। चीफ जस्टिस एसए बोबड़े ने सुनवाई के दौरान कहा कि मुस्लिमों पर भी यह लागू होता है।

बता दें कि आध्र प्रदेश विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया था। इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से अपील की गई थी कि दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति के लोगों को मिलनेवाले आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। पिछले साल फरवरी में ये प्रस्ताव पेश किया गया था।

इस प्रस्ताव को राज्य के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने पेश किया था। उन्होंने कहा कि दशकों से दलित ईसाई आरक्षण के लिए संघर्त कर रहे हैं। उनकी मांग उचित है। साथ ही उन्होंने कहा था कि उन्हें भी वहीं लाभ मिलना चाहिए जो सिख और बौद्ध धर्म के दलितों को दिया जाता है।

इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बच्चों के साथ दुष्कर्म और उत्पीड़न के मामले में सुनवाई करते हुए। सभी राज्यों को निर्देश देते हुए कहा है कि पोक्सो से जुड़े मामले निपटाने के लिए विशेष सरकारी अभियोजक नियुक्त कराए जाए। इसी के साथ फोरेंसिंक लैब के लिए संसाधन उपलब्ध कराने के लिए उठाए गए कदमों पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।

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