कांग्रेस को 32 साल का वनवास खत्म होने की आस,गठबंधन की उम्मीद

नोएडा | 27 साल यूपी बेहाल का नारा बुलंद कर उप्र चुनावी समर में बड़े जोश खरोश से उतरी कांग्रेस पार्टी के लिए जिले में 32 साल के वनवास को खत्म करने की चुनौती है। कांग्रेस की लगातार कम होती लोकप्रियता के बावजूद नोएडा, दादरी और जेवर में अभी भी काफी संख्या में परंपरागत मतदाता पार्टी से जुड़े हुए हैं। हालांकि उप्र में कांग्रस के सपा से संभावित गठबंधन के चलते जिले की तीनों सीटें सपा के खाते में जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। अलबत्ता पार्टी नेताओं का मानना है कि गठबंधन के कारण सपा उम्मीदवारों की जीत का बड़ा आधार कांग्रेसी बनेंगे। लिहाजा गठबंधन उम्मीदवार की जीत होने पर कांग्रेस को 32 साल के वनवास से मुक्ति के अलावा जिले में दोबारा मजबूती मिलेगी। congress

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उल्लेखनीय है कि दिल्ली से सटे औद्योगिक महानगर नोएडा की स्थापना में कांग्रेस के संजय गांधी और नारायण दत्त तिवारी का अहम योगदान रहा है। शुरुआती कांग्रेसी प्रभाव के कारण जिले में बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थक हैं, जिस वजह से 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार रमेश चंद तोमर के चुनावी मैदान से हटने के बावजूद 12696 मत कांग्रेस को मिले थे। जबकि कांग्रेस का उम्मीदवार मैदान में ही नहीं था। स्थानीय पदाधिकारियों का मानना है कि गठबंधन पर अगले 2 3 दिनों में फैसला होने की उम्मीद है। उसी के बाद अगली रणनीति तय की जाएगी।

पिछले तीन दशक से ज्यादा समय से कांग्रेस का गौतमबुद्ध नगर में खाता नहीं खुल पाया है। 2012 में परिसीमन के बाद नोएडा अलग विधानसभा सीट बनी थी। उससे पहले यह दादरी विधानसभा का हिस्सा था। दादरी विधान सभा सीट पर 37 साल पहले 1980 में कांग्रेस के विजय पाल भाटी ने जीत दर्ज की थी। जबकि जेवर विधानसभा सीट पर 32 साल पहले कांगे्रस के रतन स्वरूप राही ने 1985 में जीत हासिल की थी। उसके बाद से अभी तक जिले की किसी भी सीट पर कांग्रेस को कामियाबी नहीं मिल पाई है।

पार्टी पदाधिकारियों के मुताबिक, राहुल गांधी भी एक साल के दौरान दो बार गौतमबुद्ध नगर आ चुके हैं। किसान यात्रा, राहुल संदेश यात्रा और खाट सभा के जरिए पार्टी ने दोबारा जनाधार तैयार करने का प्रयास किया है। कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति ने गांवों और शहरों का दौरा कर लोगों की नब्ज टटोली है।बताया गया है कि समिति ने रपट को प्रदेश के बड़े नेताओं को भेज दिया है।

 हालांकि सूत्रों के अनुसार पीके टीम और राजबब्बर की अलग  अलग पसंद  ना पसंद के चलते नेता दो गुटों में बंटे हुए हैं। जीतने वाले चेहरों के बजाए चहेतों को टिकट देने पर नेताओं में खींचतान हो रही है। दो दिनों पहले जेवर विधान सभा सीट पर 2012 में महज 9500 मतों से हारने वाले कद्दावार कांग्रेसी धीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है।

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