अब एल्युमिनियम की बोतल में कोक बेचने की तैयारी

नई दिल्ली। अमेरिकी सॉफ्ट कोल्ड ड्रिंक कंपनी कोका-कोला भारत में कोक, कोक जीरो, डाएट कोक और स्प्राइट जैसे कोल्ड ड्रिंक एल्युमिनियम की बोतलों में उतारने की तैयारी कर रही है। कंपनी के शीर्ष अधिकारी ने इकनॉमकि टाइम्स अखबार को बताया कि अगले तीन-चार सालों में कंपनी ऐसा कर सकती है। coca cola

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200 एमएल की एल्युमिनियम बोतल अमेरिका, ब्रिटेन और चीन में काफी लोकप्रिय हैं। एल्युमिनियम बोतलों की कीमत भारत में प्रचलित पेट बोतलों (रिसाइकल हो सकने वाले शीशे से बनी) से करीब 40 प्रतिशत अधिक होती है।

कोका-कोला समेत दूसरे सॉफ्ट ड्रिंक निर्माता लंबे समय से धातु के बने कैन का इस्तेमाल करते रहे हैं लेकिन एल्युमिनियम बोतल का प्रयोग साल 2005 में शुरू हुआ। थोड़े ही समय में ये बोतल काफी लोकप्रिय हो गई। माना जाता है कि इन बोतल में कोल्ड ड्रिंक पर सूरज की रोशनी का भी कम असर होता है। साथ ही इन्हें रखना और एक से दूसरी जगह पहुंचाना भी आसान होता है।

कोका कोला को यकीन है कि दूसरे देशों की तरह भारतीय ग्राहकों को भी ये बोतल पसंद आएंगी। कंपनी ने करीब डेढ़ साल पहले भारतीय बाजार में कोक जीरो को एल्युमिनियम कैन में उतारा था। कंपनी को यकीन है कि भारतीय ग्राहक भी कोका कोला को नए अवतार में भी पहले ही की तरह स्वीकार करेंगे। हालांकि एल्युमिनियम बोतल में आने वाला कोका कोला महंगा हुआ तो इसकी भारत में इसकी बिक्री पर असर पड़ सकता है लेकिन कोका-कोला ने अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

साल 2013 में भारतीय बाजार में 1195.5 करोड़ लीटर कोल्ड ड्रिंक की बिक्री हुई थी। साल 2008 की तुलना में 2018 में सॉफ्ट ड्रिंक की खपत करीब 170 प्रतिशत बढ़ गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार साल 2018 तक भारतीय के सॉफ्ट ड्रिंक बाजार में 19 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी होती रहेगी। साल 2014 के आंकड़ों के अनुसार भारतीय सॉफ्ट ड्रिंक बाजार में कोका-कोला की हिस्सेदारी करीब 29 प्रतिशत थी। एक यूरोपीय संस्था के अध्ययन के अनुसार साल 2015 में भारत में प्रति व्यक्ति सॉफ्ट ड्रिंक की खपत 13 लीटर थी।

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